रामनाथ कोविंद की जीत से भाजपा ने नया सियासी समीकरण साधा

PUBLISHED : Jul 21 , 8:08 AMBookmark and Share




यूपी के दलित समुदाय से आने वाले रामनाथ कोविंद को देश के सर्वोच्च पद पर पहुंचाकर भाजपा ने 2019 के आम चुनाव के लिए सामाजिक समीकरणों की जमीन भी तैयार कर ली है। नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कोविंद अब भले ही भाजपा के सक्रिय नेता न रहे हों, लेकिन वह परोक्ष रूप से भाजपा के सबसे बड़े दलित चेहरा बन गए हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति में दलित व पिछड़ा समीकरण सबसे ऊपर है। दोनों सर्वोच्च पदों पर दलित व पिछड़ा वर्ग के नेता उसकी नई पहचान बनते जा रहे हैं।

हालांकि भाजपा पहले भी छह साल सत्ता में रही है, लेकिन उस दौरान वह अपनी शहरी और अगड़े वर्ग की पार्टी की छवि से बाहर नहीं निकल पाई। मगर मोदी व शाह की रणनीति से अब स्थितियां बदल गई हैं। हरियाणा, यूपी से लेकर ओडिशा (निकाय चुनाव), असम व मणिपुर तक भाजपा की चुनावी सफलता में जो सामाजिक समीकरण बने थे वे कोविंद के राष्ट्रपति बनने से और मजबूत होंगे।

दलितों में भाजपा को लेकर झिझक दूर होगी।  भाजपा ने अपनी रणनीति में एक और बदलाव किया है। पार्टी में दलित व पिछड़े नेता अब दलित व पिछड़ा मोर्चा की अगुआई तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पार्टी की मुख्यधारा का नेतृत्व करेंगे। इसी के तहत गुजरात समेत छह राज्यों के चुनाव में पार्टी तीन सीएम पिछड़े वर्ग से बना सकती है।

महामहिम कोविंद जीतते ही भावुक हुए

रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति होंगे। राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ एनडीए के उम्मीदवार कोविंद ने विपक्ष की उम्मीदवार मीरा कुमार को तीन लाख 34 हजार 730 मत मूल्य के अंतर से पराजित किया। कोविंद को 65.65 फीसदी मत मिले जबकि मीरा कुमार को 34.35 फीसदी मत ही हासिल हो सके। राष्ट्रपति निर्वाचित होने के ठीक बाद रामनाथ कोविंद अपने पुराने दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए।

कोविंद भाजपा के पहले सदस्य हैं जो राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। कोविंद ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि आज देश में कितने ही रामनाथ होंगे जो भीग रहे होंगे, कोई खेती कर रहा होगा। वे उन सबसे कहना चाहते हैं कि परौंख गांव का ये रामनाथ उनका प्रतिनिधि बनकर जा रहा है। कोविंद ने बड़ी साफगोई से स्वीकार किया है कि इस सर्वोच्च पद के बारे में न तो उन्होंने कभी सोचा था और न ही उनका यह लक्ष्य था।

देश व समाज सेवा का भाव उन्हें यहां तक ले आया है और वे इसे इस सेवा भाव का फल ही मानते हैं। उन्होंने कहा, ‘जिस पद का गौरव डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. राधाकृष्णन, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और प्रणब मुखर्जी जैसे लोगों ने बढ़ाया है, उस पद पर रहना उनके लिए गौरव की बात है। यह मेरे लिए भावुक क्षण है।’
 
यूपी से सबसे अधिक वोट :   कोविंद को सबसे अधिक वोट उत्तर प्रदेश और सबसे कम वोट पश्चिम बंगाल से मिले। भाजपाशासित उत्तर प्रदेश में कोविंद को 355 वोट (69,680 मूल्य) मिले वहीं कुमार को 65 (13,520) वोट मिले। बिहार में कोविंद को कुल 239 वैध वोट में से 130 वोट मिले, जबकि मीरा को यहां 109 वोट मिले।

वीडियो

More News