प्रदेश में अब कोई कालोनी अवैध नहीं कहलायेगी

PUBLISHED : Apr 01 , 8:01 AMBookmark and Share



कालोनियों को नियमित करने सरकार ने बनाये धनराशि आवंटित करने के नियम
डॉ नवीन आनंद जोशी
भोपाल।
प्रदेश में अब अवैध कालोनी का टंटा खत्म हो गया है तथा अब कोई भी कालोनी अवैध नहीं कहलायेगी। अवैध कहलाने वाली कालोनियों में अधोसंरचना विकसित करने के लिये राज्य सरकार ने धनराशि आवंटित करने का नियमों में प्रावधान कर दिया है तथा नियमों में सिर्फ ''कालोनी को नियमितÓÓकरने के शब्दों का उल्लेख है न कि ''अवैध कालोनी को नियमितÓÓ करने का।
राज्य सरकार ने नगरीय निकायों में अधोसंचना विकसित करने के लिये अलग से धनराशि दिये जाने के लिये वर्ष 2006 में ''मप्र के नगरीय क्षेत्रों में विशेष आवश्यक्ताओं एवं आकस्मिक प्रयोजनों के लिये राशि के उपयोग के नियम बनाये थे। अब दस साल बाद इन नियमों में संशोधन कर दिया गया है।
संशोधित नियमों के अनुसार, अब इन नियमों के तहत निर्मित निधि में से बीस प्रतिशत राशि राज्य स्तर पर रखी जायेगी तथा शेष राशि विशेष आवश्यक्ताओं एवं आकस्मिक प्रयोजनों के लिये राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर राज्य सरकार द्वारा किये गये विनिश्चय के अनुरुप नगरीय स्थानीय निकायों को आवंटित की जायेगी। राज्य स्तर की निधि से छोटे तथा मध्यम शहरों की जलापूर्ति योजनाओं को पूरा करने के लिये अपेक्षित वास्तविक लागत एवं अनुमोदित राशि के अंतर की प्रतिपूर्ति करने के लिये तथा न्ररीय स्थानीय निकायों को कालोनियों को नियमित करने हेतु अधोसंरचना विकास हेतु अनुदान उपलब्ध करवाने के लिये व्यय किया जायेगा। पहले नियमों में यह प्रावधान नहीं था।
इसी प्रकार अब उक्त नियमों के तहत निर्मित निधि से एक वर्ष के दौरान नगर परिषदों को अधिकतम एक करोड़ रुपये, नगर पालिका को अधिकतम डेढ़ करोड़ रुपये, पांच लाख तक की जनसंख्या वाले नगर निगमों को अधिकतम ढाई करोड़ रुपये तथा पांच लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगर निगमों को अधिकतम पांच करोड़ रुपये दिये जायेंगे। पहले एक वर्ष के दौरान नगर परिषदों को अधिकतम 50 लाख रुपये, नगर पालिकाओं और नगर निगमों को अधिकतम एक करोड़ रुपये एवं सिर्फ भोपाल नगर निगम को अधिकतम दो करोड़ रुपये देने का प्रावधान था।

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