प्रदेश में वाहनों पर बढ़ा लाईफ टाईम टैक्स

PUBLISHED : Sep 04 , 8:54 PMBookmark and Share


प्रदेश में वाहनों पर बढ़ा लाईफ टाईम टैक्स

मोदी सरकार द्वारा चालानी राशि बढ़ाने के बाद अब कमलनाथ की दोहरी मार

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत देश मे जहाँ चालान की राशि बढ़ गई, वहीं मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने भी वाहनों पर लगने वाला लाईफ टाईम टैक्स  बढ़ा दिया है।
सरकार अब दस लाख रुपये से कम कीमत के वाहनों पर इस प्रकार जीवन काल कर वसूलेगी : डीजल चलित वाहन पर 8 के बजाये 10 प्रतिशत, पेट्रोल/हाईब्रिड/सीएनजी/एलपीजी द्वारा चलित वाहनों पर 6 के बजाये 8 प्रतिशत लगेगा। राज्य सरकार ने बैटरी चलित वाहन पर जीवनकाल घटाकर 5 के बजाये 4 प्रतिशत किया है।इसी प्रकार, दस लाख रुपये से अधिक परन्तु 20 लाख रुपये तक की कीमत के वाहनों पर इस प्रकार जीवन काल कर लगेगा : डीजल चलित वाहन पर 9 के बजाये 12 प्रतिशत, पेट्रोल/हाईब्रिड/सीएनजी/एलपीजी द्वारा चलित वाहनों पर 7 के बजाये 10 प्रतिशत लगेगा। बैटरी चलित वाहन पर जीवन काल की दर 6 से घटाकर 4 प्रतिशत की गई है।
बीस लाख रुपये से अधिक कीमत के वाहनों पर भी अब नई दरों से जीवन काल कर लगेगा। इसके अंतर्गत डीजल चलित वाहन पर 16 प्रतिशत, पेट्रोल/हाईब्रिड/सीएनजी/एलपीजी द्वारा चलित वाहनों पर 14 प्रतिशत तथा बैटरी चलित वाहन पर जीवन काल की दर 4 प्रतिशत लगेगा।

ग्रीन टैक्स में भी वृध्दि :

राज्य सरकार ने वाहनों पर लगने वाले ग्रीन टैक्स में भी वृध्दि कर दी है। अब दो पहिया वाहन पर 500 रुपये प्रति पांच वर्ष के स्थान पर 2 हजार रुपये प्रति पांच वर्ष और दो पहिया वाहन से भिन्न वाहन पर एक हजार रुपये प्रति पांच वर्ष के स्थान पर 5 हजार रुपये प्रति वर्ष लगेगा। परन्तु अब यह ग्रीन टैक्स बैटरी चलित वाहनों पर नहीं लगेगा।
संशोधित अधिनियम बनने के कारण ऐसा हुआ :
राज्य सरकार ने गत विधानसभा में मप्र मोटरयान कराधान संशोधन विधेयक पारित किया था जिसे अब राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसी कारण से करों में यह वृध्दि हुई है। अधिनियम में जरुर एक राहत दी गई है कि करों की अदायगी हेतु परिवहन कार्यालय द्वारा जो नोटिस दिया जाता है उसके खिलाफ अपील करने पर पहले बकाया टैक्स पहले जमा करना होता था परन्तु अब बकाया कर का मात्र 50 प्रतिशत ही जमा करना होगा। राज्य सरकार ने इस संशोधन अधिनियम के जरिये यात्री एवं माल वाहनों के टैक्स में भी वृध्दि कर दी है।

राज्य उच्च शिक्षा परिषद का गठन हुआ

भोपाल। प्रदेश सरकार ने पिछली शिवराज सरकार के समय बने मप्र राज्य उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम 2018 के तहत अब राज्य उच्च शिक्षा परिषद का गठन कर दिया है। परिषद के अध्यक्ष उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी बनाये गये हैं जबकि उपाध्यक्ष अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा नियुक्त किये गये हैं। दो सरकारी विवि देवी अहिल्या विवि इंदौर और अवधेश प्रताप सिंह विवि रीवा एवं निजी विवि आईटीएम विवि ग्वालियर के कुलपति सदस्य बनाये गये हैं। पूर्व कुलपति व आचार्य जबलपुर प्रो. जगमोहन केलर, जीवाजी विवि लियन पर डायरेक्टर पांडिचेरी विवि प्रो. राजीव जैन, कालिदास शा. महाविद्यालय उज्जैन की प्रो. वंदना मालवीय, शा. पीजी कालेज रतलाम की डा. अन्जेला सिंघारे, रिटायर्ड प्रोफेसर जवाहरलाल नेहरु विवि दिल्ली प्रो. एसके केजरीवाल, विभागाध्यक्ष ऊर्जा विभाग आईआईटी मुम्बई प्रो. चेतन सोलंकी भी सदस्य बनाये गये हैं। पदेन सदस्यों में अपर मुख्य सचिव तकनीकी शिक्षा, आयुक्त उच्च शिक्षा, संचालक स्कूल आफ एक्सीलेंस भोपाल, प्राचार्य शा. सरोजिनी नायडू कन्या कालेज भोपाल व शा. होल्कर विज्ञान कालेज इंदौर के प्राचार्य, भोपाल स्कूल आफ सोशल साईंसेस भोपाल व सेंट अलायसियस कालेज जबलपुर के प्रचार्य तथा परियोजना संचालक राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान शामिल हैं।
यह काम करेगी परिषद :
मप्र राज्य उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम 2018 के उद्देश्यों में कहा गया है कि राज्य में उच्च शिक्षा के लिये व्यापक, दीर्घकालिक और विस्तृत शिक्षा योजना का विकास करने के लिये सर्वोच्च नीति निकाय की आवश्यक्ता है। केंद्रीय तंत्र के माध्यम से राज्य के विश्वविद्यालयों को पूर्ण रुप से मानीटर नहीं किया जा सकता है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान, राज्य में उच्च शिक्षा के योजनाबध्द और समन्वित विकास करने, विश्वविद्यालयों के मध्य संसाधनों की सहभागिता, संस्थागत स्तर पर प्रमुख शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार करने, संस्थाओं को निधि देने के लिये सिध्दांत स्थापित करने उच्च शिक्षा का डाटा बैंक संधारित करने और गवेशणा संचालित करने तथा अध्ययन का मूल्यांकन करने के लिये राज्य उच्च शिक्षा परिषद गठित करने की अपेक्षा करता है। इसलिये राज्य उच्च शिक्षा पध्दति के प्रभावी रुप से कार्य करने के लिये राज्य में अधिनियमित राज्य उच्च शिक्षा परिषद स्थापित करने की आवश्यक्ता है। इसी परिपेक्ष्य में मंगलवार को राज्य सरकार ने आदेश जारी कर इस अधिनियम के तहत राज्य उच्च शिक्षा परिषद का गठन कर दिया है।
डॉ. नवीन जोशी

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