कश्मीरः बातचीत के लिए दरवाजे ही नहीं, रोशनदान भी खुले हैं- राजनाथ

PUBLISHED : Sep 05 , 1:18 PMBookmark and Share




हुर्रियत नेताओं से मिलने पहुंचे सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से उनके मिलने से मना कर देने के एक दिन बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अलगाववादियों का रवैया दर्शाता है कि वे कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत में यकीन नहीं रखते हैं।

वहां के हालात की जानकारी देते हुए राजनाथ सिंह ने आज बताया कि शांति के लिए अलग-अलग लोगों से डेलिगेशन की अच्छी बातचीत हुई है। जम्मू कश्मीर के गर्वनर और मुख्यमंत्री से बातचीत हुई। स्टेट के सभी मंत्रियों से बात हुई। सभी चाहते हैं कि हालात सुधरे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा।

हुर्रियत से नहीं हुई बात

हुर्रियत से मिलने वाली बात पर उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो भी अमन व शांति चाहते हैं हम सभी से बातचीत को तैयार हैं। शांति के लिए हमारे दरवाजे ही नहीं बल्कि रोशनदान तक खुले हैं। हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि इस मामले में हुर्रियत से कोई बातचीत नहीं हुई है। ऑल पार्टी डेलिगेशन के अलगाववादियों से मिलने की बात उन्होंने कहा कि कुछ मेंमर्स उनसे मिलने गए थे। इसके लिए मेरी न तो हां थी और न ना। लेकिन फिर भी वे गए। इस दौरान उनके साथ अलगाववादियों का व्यवहार न तो कश्मीरियत भरा रहा और ना ही इंसानियत जैसा।

रविवार को अलगाववादियों से मिला था डेलिगेशन

इससे पहले अलगाववादियों को वार्ता की मेज तक लाने के शिष्टमंडल के कुछ सदस्यों के प्रयास नाकाम रहे थे। कुछ संसद सदस्यों ने अलगाववादियों को वार्ता का प्रस्ताव दिया था जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था। शिष्टमंडल के ये सदस्य रविवार को नियमित बैठकों को छोड़कर इन अलगाववादी नेताओं के पास पहुंचे थे ताकि शिष्टमंडल के समक्ष अपनी बात और विचारों को रखने के लिए उन्हें मनाया जा सके।

अलगाववादी नताओं से मिलने पहुंचे सांसदों में से एक माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने आज कहा कि उन्हें शिष्टमंडल के साथ बिना शर्त वार्ता शुरू करनी चाहिए।

कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कुछ संसद सदस्य अलगाववादियों तक पहुंचे लेकिन यह उनका व्यक्तिगत फैसला था। उन्होंने कहा कि यह सरकार या शिष्टमंडल का फैसला नहीं था।

पैलेट की जगह पावा सेल्स
कश्मीर में पैलेट गन के इस्तेमाल पर राजनाथ सिंह ने कहा कि जब मैं इससे पहले कश्मीर आया था लोगों ने पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर शिकायत की थी। इस पर मैंने समिति बनाई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट दे दी है जिसमें पैलेट गन की जगह पावा सेल्स का सुझाव दिया गया। पावा से किसी की जान नहीं जाएगी। पावा सेल्स कश्मीर पहुंच चुके हैं।

शिकायत के लिए नोडल ऑफिसर तैनात
उन्होंने कहा कि पिछली बार उनसे कहा गया था कि भारत के दूसरे हिस्सों में रहने वाले कश्मीर के बच्चों की कुछ शिकायत रहती है। इसके लिए एक नोडल ऑफिसर संजय राय को तैनात कर दिया गया है। साथ ही चौबिस घंटे खुली रहने वाली हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अमन बहाली का उपाय खोजने के उददेश्य से रविवार को शिष्टमंडल ने समाज के विभिन्न वर्गों के 30 प्रतिनिधिमंडलों के करीब 300 लोगों से मुलाकात की थी।

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