अपनी बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा न बढ़ने लगे वजन, काबू करें ऐसे

PUBLISHED : Oct 17 , 8:09 AMBookmark and Share


अपनी बढ़ती उम्र के साथ ज्यादा न बढ़ने लगे वजन, काबू करें ऐसे

उम्र के साथ वजन बढ़ना सामान्य बात है। अब नई रिसर्च में पता चला है कि जब हम वजन बढ़ने की इस आंतरिक प्रक्रिया को समझ लेते हैं, तो इसे काबू करना आसान होता है। इस तरह जीवन में 60 और 70 साल का पड़ाव पार करने के बाद भी सामान्य काया हासिल की जा सकती है। स्वाभाविक रूप से सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक असर पड़ता है।  

स्टॉकहोम, स्वीडन स्थित कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने 13 साल के अध्ययन में पाया है कि जैसे-जैसे इन्सान की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे लिपिड की प्रक्रिया धीमी होती जाती है। वजन बढ़ने का यही सबसे बड़ा कारण होता है। लिपिड में वसा, तेल, स्टेरॉयड शामिल होते हैं।  यह भी सच है कि लिपिड्स शरीर के लिए आवश्यक हैं। एनर्जी स्टोर करने के अलावा लिपिड हमारी नर्व्स के आसपास एक रक्षात्मक परत बनाते हैं। ये स्वस्थ कोशिका झिल्ली के लिए बहुत अहम होते हैं। कोशिका झिल्ली यानी प्रत्येक कोशिका की बाहरी परत।  बढ़ती उम्र से साथ बढ़ते वजन पर यह अनुसंधान कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट में मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. पीटर आर्नेर के नेतृत्व में हुआ है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हुई है।

इसलिए जमा होती है वसा

सभी जानते हैं कि बॉडी मॉस इंडेक्स यानी व्यक्ति की लंबाई और वजन का अनुपात - यदि 25 से ऊपर है तो यह मोटापे का संकेत है। जब कैलोरी का ज्यादा सेवन होता है, लेकिन उसकी खपत (बर्न) नहीं होती है, तब यह स्थिति बनती है। शरीर इस अतिरिक्त कैलोरी को वसा के रूप में जमा कर लेता है।  स्वीडन के वैज्ञानिकों ने शरीर में वसा जमा होने और उम्र के बीच का रहस्य पता लगा लिया है। यह बात अब और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि मोटापा महामारी का रूप धारण करता जा रहा है। साथ ही जैसे-जैसे इलाज की सुविधाएं बढ़ी हैं, पूरी दुनिया में उम्रदराज लोगों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि हुई है।  

हम भारतीयों के लिए इसके क्या मायने हैं

एक अनुमान के मुताबिक, दुनिया में 650 मिलियन लोग मोटापे के शिकार हैं। इनके अलावा 1.9 मिलियन और लोग इस बीमारी के मुहाने पर खड़े हैं। हर साल मोटापे से जुड़ी बीमारियों के कारण 2.8 मिलियन लोग जान गंवाते हैं। भारत में मोटापे के शिकार लोगों का आंकड़ा 135 मिलियन है। एक अन्य अनुमान कहता है कि 16.9% से 36.3% लोगों का पेट बाहर निकल रहा है। मोटा पेट हार्ट संबंधी बीमारियों की जड़ होता है और इन्हीं बीमारियों के कारण भारत में सबसे अधिक लोग जान गंवाते हैं।  वैसे भी मोटापा बीमारियों  का घर है यानी इसके बाद डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पाचन संबंधी समस्याएं और स्त्रीरोग हावी हो जाते हैं।

myupchar.com से जुड़े मेडिकल प्रैक्टिशनर डॉ. आयुष पांडे बताते हैं, ‘कुछ एक्सपर्ट्स तर्क देते हैं कि 18 से 24 आयुवर्ग के लोगो की तुलना में 35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में मोटापे का शिकार होने का खतरा तीन गुना ज्यादा रहता है। सवाल है आखिरी ऐसा क्यों?’

अध्ययन कहते हैं एक्टिव रहें

2015 में अनुसंधानकर्ताओं ने पता लगाया कि लिपिड मटैबलिज्म यानी वसा के पाचन की प्रक्रिया में गड़बड़ के कारण बढ़ती उम्र में कई समस्याएं खड़ी होती हैं। हालांकि कम्प्युटेशनल एंड स्ट्रक्चरल बायोटेक्नोलॉजी में प्रकाशित इस अध्ययन में मोटापे और वसा के पाचन का सीधा संंबंध स्थापित नहीं किया गया। स्वीडन में कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट और उपासला यूनिवर्सिटी के साथ ही फ्रांस की यूनिवर्सिटी ऑफ ल्योन ने मिलकर 54 पुरुषों और महिलाओं पर 13 साल तक अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर में वसा की खपत कम होती है। यानी यदि बढ़ती उम्र में भी इन्सान एक्टिव नहीं है और कैलोरी पहले की तरह ही ले रहा है तो उसका औसत वजन 20 फीसदी तक बढ़ जाएगा।

ये भी हैं मोटापे के इलाज

आजकल सर्जरी से मोटापे का इलाज संभव है। साथ ही लाइफ स्टाइल  और खान-पान में बदलाव से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। बेरिएट्रिक सर्जरी भी एक आखिरी विकल्प होता है, जिसे आमतौर पर डॉक्टर तब आजमाते हैं, जब मरीज मोटापे के साथ ही डायबिटीज और हायपरटेंशन से ग्रस्त हो।

यह अपने तरह का पहला अध्ययन है, जिसने यह दिखाया है कि उम्र बढ़ने के साथ हमारे फैट टिश्यू भी बदलते हैं। सेहत से जुड़े दूसरे फैक्टर्स चाहे जो हों, ऐसा होता ही है। बहरहाल, वक्त के साथ इन्सान जाग्रत हुआ है। मोटापे से बचने के उपायों को लेकर उसकी समझ बढ़ी है। इन उपायों को आजमाकर बढ़ती उम्र में भी वजन को काबू रखा जा सकता है।

 

अधिक जानकारी के लिए देखें: https://www.myupchar.com/disease/obesity

स्वास्थ्य आलेख www.myUpchar.com द्वारा लिखे गए हैं।

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