जी करता है थोड़ी देर यहीं बैठे रहें

PUBLISHED : Apr 06 , 8:28 AMBookmark and Share



क्षिप्रा-नर्मदा मैया के मिलन को देख हो रही अदभुत आनंद की अनुभूति'

'माँ क्षिप्रा और नर्मदा के मिलन को देख अदभुत आनन्द की अनुभूति हो रही है, जी करता है थोड़ी देर यहीं बैठे रहें। क्षिप्रा के घाटों का दृश्य नयनाभिराम हो चला है।'' मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह विचार उस वक्त व्यक्त किये, जब वे उज्जैन के भूखीमाता घाट पर क्षिप्रा के चार घाटों के लोकार्पण के लिये पहुँचे थे। मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ के लिये तैयार किये गये 28 करोड़ 27 लाख रुपये की लागत के चार घाट का लोकार्पण किया। इनमें भुवनेश्वरी घाट, राज-राजेश्वरी घाट, गऊघाट स्टापडेम से लालपुल (बांया तट) घाट एवं गुरूनानक घाट शामिल हैं।

आज क्षिप्रा में नर्मदा का पानी छोड़े जाने से तट पर दृश्य अदभुत हो गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दृश्य आँखों को सुकून दे रहा है। क्षिप्रा और नर्मदा मैया साथ-साथ बह रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बार परम्परागत आयोजनों के साथ-साथ विश्व-शान्ति का दर्शन और सन्देश भी सिंहस्थ से जायेगा।

2043 मीटर लम्बे घाटों का लोकार्पण

श्री चौहान ने भूखी माता घाट पर क्षिप्रा के 2043 मीटर लम्बे घाटों का लोकार्पण किया। भुवनेश्वरी घाट की लम्बाई 571 मीटर है। राज-राजेश्वर घाट 192 मीटर, गऊघाट स्टापडेम से लाल पुल (बाँया तट) घाट 580 मीटर तथा गुरूनानक घाट 700 मीटर लम्बाई में बनवाया गया है। भुवनेश्वरी घाट 27.20 मीटर चौड़ा होकर 7.94 करोड़ की लागत से बनाया गया है। इसकी बॉटम लेंडिंग चौड़ाई तीन मीटर है और बॉटम लेंडिंग का एरिया 1713 वर्गमीटर है। राज-राजेश्वरी घाट 2 करोड़ 29 लाख रुपये व्यय करके बनवाया गया है। इसकी चौड़ाई 18.50 मीटर, बॉटम लेंडिंग चौड़ाई चार मीटर तथा बॉटम लेंडिंग एरिया 768 वर्गमीटर है। गऊघाट स्टापडेम से लालपुल बांया तट घाट पर 8 करोड़ 20 लाख रूपये व्यय किये गये हैं। इसकी चौड़ाई 14.10 मीटर, बॉटम लेंडिंग चौड़ाई पाँच मीटर और बॉटम लेंडिंग एरिया 2900 वर्गमीटर है। गुरूनानक घाट 9 करोड़ 84 लाख रुपये व्यय करके बनवाया गया है। चौड़ाई 28 मीटर, बॉटम लेंडिंग चौड़ाई तीन मीटर तथा बॉटम लेंडिंग एरिया 2586 वर्गमीटर में है।

131 फीट ऊँचे त्रिशूल का मुख्यमंत्री ने किया पूजन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दत्त अखाड़ा क्षेत्र में स्थापित 131 फीट ऊँचे त्रिशूल का पूजन पूरे विधि-विधान से किया। त्रिशूल सिंहस्थ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिये आकर्षण का केन्द्र रहेगा। त्रिशूल का निर्माण बजाज कम्पनी के सहयोग से किया गया है।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने दत्त अखाड़ा मंदिर में भगवान दत्तात्रय के दर्शन कर सफल सिंहस्थ की कामना की। उन्होंने जगतगुरू भगवान शंकराचार्य द्वारा स्थापित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की और दत्त अखाड़ा में संतों की समाधियों पर जाकर शीश नवाया।

पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का लोकार्पण

श्री चौहान ने त्रिवेणी में पंचक्रोशी यात्रा मार्ग का लोकार्पण किया। इस मौके पर प्रभारी मंत्री श्री भूपेंद्रसिंह, सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय एवं डॉ. सत्यनारायण जटिया, विधायक डॉ. मोहन यादव भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने 68 करोड़ के पंचक्रोशी यात्रा मार्ग के उन्नयन एवं नवीनीकरण कार्य का लोकार्पण किया।

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