मप्र में पत्रकारों पर सबसे ज्यादा हमले

PUBLISHED : Mar 28 , 7:11 AMBookmark and Share



असुरक्षित है सच का आईना दिखाने वाले


डॉ. नवीन जोशी
-भोपाल। मध्य प्रदेश में सच का आईना दिखाने वाले पत्रकार सुरक्षित नही है।सोमवार को भिंड के पत्रकार संदीप शर्मा की कथित हत्या के मामले ने एक बार फिर यही साबित किया है। बताया जा रहा है कि संदीप ने भिंड जिले में चल रहे अवैध खनन ओर पोलिस गठजोड़ का स्टिंग किया था जिसके बाद से उन्हें धमकी मिल रही थी।सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने संदीप शर्मा की मौत की सीबीआई जांच की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजी है।
..अगर आप पत्रकार है और सच लिखना जानते हैं तो मध्य प्रदेश में आप सुरक्षित नही है,भ्रस्टाचार को उजागर करने की खबर या सिस्टम की कमियां को दिखाने से आपको शमशान का रुख करना पड़ सकता है।यही एक बार फिर हुआ है मध्य प्रदेश में जहां पूरे प्रदेश की तरह भिंड जिले में चल रहे अवैध खनन ओर पुलिस के गठजोड़ का स्टिंग करने की कीमत एक पत्रकार संदीप शर्मा को जान देकर चुकानी पड़ी है। ये पहली बार नही जब प्रदेश पत्रकारों पर हमले के मामले में देश भर में सुर्खियों में आया है। 2017 के शीतकालीन सत्र में गृह मंत्रालय ने माना था कि बीते दो सालों में पत्रकारों पर हमले के मामले में मध्य प्रदेश नंबर 1 है।


गृह मंत्रालय के मुताबिक पत्रकारों पर हमले के दर्ज मामले


मध्य प्रदेश   2015 में 19 मामले   2016 में 24 मामले दर्ज।

आंध्र प्रदेश   2015 में 1 मामला   2016 में 6

राजस्थान    2015 में 5 मामले   2016 में 0

त्रिपुरा      2015 में 0 मामले  2016 5 मामले

उत्तर प्रदेश 2015 में 1 मामला 2016 में 3 मामले

इससे पहले संदीप शर्मा को खनन माफिया ओर पुलिस के गठजोड़ को उजागर करने की धमकियों की  शिकायत उन्होंने एसपी समेत तमाम बड़े अधिकारियों से की थी।ऐसे में सोमवार को संदिग्ध हालातो में संदीप की ट्रक से कुचलकर हुई मौत संवाल खड़े करती है।यही वजह है कि अब सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र को भेजी है।

 दरअसल संदीप शर्मा की मौत की वजह बना वो स्टिंग जिसके जरिये उन्होंने बताया था कि किस तरह खनन माफिया पुलिस से सांठ गांठ कर बेख़ौफ़ रेत खनन कर रहा है।इसके बाद से उन्हें लगातार खनन माफिया से धमकियां भी मिल रही थी।सोमवार को भिंड में उन्हें एक ट्रक ने कुचल दिया।सीसीटीवी के फुटेज साफ दिखा रहे थे कि रेत से भरे ट्रक ने उन्हें पीछे से टक्कर मारकर कुचला है।जिस ट्रक ने उन्हें मारा उसके ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का लाइसेंस भी नही था।ऐसे में संवाल उठने लाज़मी थे।

वही 2018 में भले ही पत्रकार की ये पहली संदिग्ध मौत हो लेकिन पिछले साल ही प्रदेश में दो पत्रकारों की हत्या समेत पत्रकारों पर हमले के कई मामले दर्ज हुए थे।

-मंदसौर में पत्रकार कमलेश जैन की हत्या- मई 2017

-इंदौर में पत्रकार श्याम शर्मा की हत्या-मई 2017

-शिवपुरी जिले में पत्रकार संजय जैन पर हमला-अक्टूबर 2017

-बुरहानपुर में पत्रकार अजय उदासीन पर हमला- जून 2017।

-सुहागपुर में अरविंद चौरसिया पर हमला नवंबर 2017।

यही नही अवैध उत्खनन में लिप्त माफिया इस कदर बेख़ौफ़ है इसका पता इससे भी चलता है कि उसने अवैध खनन रोकने की कोशिश करने वाले सरकारी अधिकारियों को भी नही बख्शा।

- मार्च 2012 में मुरैना के बामौर कस्बे में आईपीएस नरेंद्र कुमार की ट्रेक्टर से कुचलकर हत्या।

- अप्रैल 2015 में मुरैना में सिपाही धर्मेंद्र चौहान को डंपर के नीचे कुचल दिया।

- मार्च 2015 में रीवा में एक इंस्पेक्टर को खनन माफिया में जेसीबी से कुचलने की कोशिश की।

- जून 2015 में शाजापुर जिले की नेवा नदी में अवैध रेत खनन रोकने गईं माइनिंग इंस्पेक्टर रीना पाठक के टीम पर खनन माफिया ने हमला किया।

- फरवरी 2017 में छतरपुर जिले में अवैध खनन रोकने गईं आईपीएस सोनिया मीना पर हमला किया गया।

- मार्च 2017 में पिपरिया में तहसीलदार विकी सिंहमारे ओर उनकी टीम पर खनन माफिया ने हमला किया।

जाहिर है प्रदेश में जब सरकारी कर्मचारी ही सुरक्षित नही तो पत्रकारों की क्या बिसात।
...मध्य प्रदेश जहां कुपोषण के साथ साथ मातृ मृत्यु दर ,शिशु मृत्यु दर,महिला बलात्कार में नम्बर 1 है तो इन जैसी विषयों पर लिखकर सरकार को हिलाने वाले पत्रकारों पर हमले के मामले में भी  नंबर 1 है। वही अवैध खनन के मामले में देश में दूसरे नंबर पर रहने वाले प्रदेश में अवैध खनन को उजागर करने वाले पत्रकार की मौत से साबित होता है कि शिव के राज में सच की आवाज उठाने वाली की आवाज दबाई जा रही है।
डॉ. नवीन जोशी

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