भारत-रूस में एस-400 वायु रक्षा मिसाइलों का होगा करार

PUBLISHED : Oct 14 , 7:22 AMBookmark and Share




   

रूस और भारत शनिवार को एस-400 ट्रंफ लंबी दूरी की क्षमता वाली वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली सहित कई रक्षा करार करेंगे। रूस की सरकारी मीडिया की ओर से गुरुवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली वार्षिक शिखर वार्ता के बाद कई अहम रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे।

रूस के राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव के हवाले से तास समाचार एजेंसी ने कहा,ब्रिक्स सम्मेलन से इतर दोनों नेताओं की बातचीत के बाद भारत को एस-400 ट्रंफ विमान रोधी मिसाइल प्रणाली की आपूर्ति पर एक समझौता किया जाएगा। कुछ अन्य दस्तावेजों पर भी दस्तखत किए जाएंगे। उन्होंने कहा, भारत तीन प्रकार की मिसाइलों पर निशाना साधने में सक्षम सबसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली में से पांच प्रणालियां हासिल करने में रुचि रखता है। इसमें अपनी तरफ आ रहे दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और यहां तक कि ड्रोनों को 400 किलोमीटर तक के दायरे में मार गिराने की क्षमता है।

उशाकोव ने कहा कि रक्षा सौदे से जुड़े दस्तावेजों पर बंद दरवाजों में दस्तखत किए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने सौदे का ब्योरा नहीं दिया। एजेंसी के मुताबिक रूस की भारत के लिए प्रोजेक्ट 11356 के तहत युद्धपोत बनाने के संबंध में समझौता करने की और कामोव का-226 टी हेलीकॉप्टर के उत्पादन के संयुक्त उपक्रम स्थापित करने की भी योजना है। सुखोई 30-एमकेआई को उन्नत बनाने पर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है ।

अधिकारियों ने बताया कि परमाणु सहयोग के मुद्दे पर दोनों पक्ष एक जनरल फ्रेमवर्क एग्रीमेंट को अंतिम रूप देने और कुडनकुलम परियोजना के तहत इकाई-5 और इकाई-6 के लिए एक ऋण करार तैयार करने का काम कर रहे हैं। इसपर भी शिखर वार्ता में मुहर लगने की संभावना है।

गौरतलब है कि अगर भारत समझौते पर हस्ताक्षर करता है तो यह चीन के बाद इस मिसाइल प्रणाली का दूसरा ग्राहक होगा। चीन ने पिछले साल तीन अरब डॉलर का करार किया था। एस-400 पहले केवल रूसी रक्षा बलों के लिए ही उपलब्ध था। यह एस-300 का उन्नत संस्करण है। अलमाज-आंते ने इसका उत्पादन किया है और रूस में 2007 से यह सेवा में है।

ब्रिक्स सम्मेलन से इतर मोदी की 10 द्विपक्षीय मुलाकातें
गोवा में 15 अक्तूबर से शुरू हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और बिम्सटेक सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 द्विपक्षीय मुलाकातें करेंगे। इनमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन भी शामिल हैं। मोदी शनिवार को पुतिन से मिलेंगे। इसी दिन चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी द्विपक्षीय वार्ता होने की संभावना है। प्रधानमंत्री सोमवार का ब्राजील के राष्ट्रपति मिचेल टेमर से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। मोदी दक्षिण अफ्रीका, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका के नेताओं से भी मिलेंगे। 16 अक्तूबर को भारत पहुंच रहीं म्यांमार की विदेशमंत्री आंग सान सू की भी मोदी से मिलेंगी।

ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों ई-वाणिज्य में सहयोग का आह्वान
ब्रिक्स के व्यापार मंत्रियों ने गुरुवार को ई-वाणिज्य के क्षेत्र में सदस्य देशों के बीच और अधिक सहयोग का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने विश्व बाजार में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मजबूत भागीदारी के लिए व्यापार के मार्ग में गैर-शुल्क अड़चने दूर किए जाने पर बल दिया। ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की छठी बैठक के बाद जारी बयान में व्यापार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी बल दिया गया। ब्रिक्स ने आईपीआर सहयोग प्रणाली (आईपीआरसीएम) गठित किया है। नेताओं ने आईपीआरसीएम को निर्धारित नियम एवं शर्तों पर काम शुरू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बेहतर तथा समन्वित तरीके से सहयोग बढ़ाने के प्रयास में तेजी लाने को कहा है।

ब्रिक्स को अक्षय ऊर्जा के लिए 51 अरब डॉलर की जरूरत
ब्रिक्स देशों को नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता सृजन का लक्ष्य हासिल करने के लिए हर साल 51 अरब डॉलर अतिरिक्त निवेश की जरूरत होगी। इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी एकोनामिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए)ने गुरुवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा, ब्रिक्स देशों के अक्षय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्यों को हासिल करने के अकेले सार्वजनिक वित्त संस्थानों से सालाना करीब 10 अरब डॉलर की जरूरत होगी। गौरतलब है कि ब्रिक्स देशों ने 2020 से 2030 के बीच अक्षय ऊर्जा उत्पादन में 500 गीगावॉट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।

अपनी मुद्राओं में कारोबार करे ब्रिक्स: अंसारी
उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने गुरुवार को कहा कि साझा संपन्नता हासिल करने के लिए ब्रिक्स देशों को अपनी ही मुद्राओं में कारोबार करने पर जोर देना चाहिए। उन्हें व्यापार के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनाने पर ध्यान देना चाहिए। नई दिल्ली में पहले ब्रिक्स व्यापार मेले का उद्घाटन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, पांच देशों के इस समूह को सामूहिक आर्थिक विकास, बेरोजगारी घटाने, गरीबी उन्मूलन व सामाजिक समावेशन बढ़ाने के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए ये कदम उठानें होंगे।

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