मनोज कुमार 'दादा साहब फाल्‍के पुरस्कार' से सम्मानित

PUBLISHED : May 04 , 7:42 AMBookmark and Share


   

 नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हिन्दी फिल्म उद्योग में भारत कुमार के नाम से मशहूर वयोवृद्ध अभिनेता मनोज कुमार को मंगलवार को हिन्दी सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्‍के पुरस्‍कार' तथा अमिताभ बच्चन और कंगना रनौत समेत विभिन्न हस्तियों को 63वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया।
 मनोज कुमार को निर्माता-निर्देशक और अभिनेता के रूप में भारतीय सिनेमा में किए गए उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में अमिताभ बच्चन को 'पीकू' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, कंगना रनौत को 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया। अमिताभ को चौथी और कंगना को तीसरी बार यह पुरस्कार मिला है। इससे पहले कंगना को 'फैशन' और 'क्वीन' के लिए यह पुरस्कार मिल चुका है।
 
अन्य श्रेणियों में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार तमिल फिल्म 'विसारनई' के लिए समुथिरकनी और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का पुरस्कार बाजीराव मस्तानी के लिए तन्वी आजमी को दिया गया।
 
फिल्म पुरस्कार समारोह में अव्यवस्था का बोलबाला : दिल्‍ली में तिरसठवें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह से पहले आज अव्यवस्था और अफरातफरी का आलम रहा और इस अनूठे क्षण का गवाह बनने के इच्छुक सैकड़ों पासधारकों को निराश लौटना पड़ा।
 
विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में शामिल होने के लिए शाम छह बजे तक का समय निर्धारित था लेकिन शाम पांच बजे से पहले ही प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और प्रवेश करने का इंतजार कर रहे लोगों को लौटने के लिए कह दिया गया। बाद में दिल्ली पुलिस के एक इंस्पेक्टर ने लाउडस्पीकर पर घोषणा की कि हॉल पूरी क्षमता तक भर जाने के कारण अब बैठने के लिए सीटें नहीं बची हैं। इसलिए कानून और व्यवस्था बनाए रखते हुए इंतजार कर रहे लोग लौट जाएं।
 
अव्यवस्था का हाल यह था कि सैकड़ों लोग विज्ञान भवन के प्रवेश द्वार पर खड़े हुए थे। बाहर खड़े लोगों में विभिन्न टेलीविजन चैनलों के पत्रकार, सूचना और प्रसारण विभाग के अधिकारी और अन्य गण्यमान्य लोग थे। यहां तक कि फिल्म बाजीराव मस्तानी में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार के लिए सम्मानित की जाने वाली अभिनेत्री और शबाना आजमी के भाई बाबा आजमी की पत्नी तन्वी आजमी के रिश्तेदार भी प्रवेश पाने के लिए इधर-उधर भटक रहे थे। कुछ लोगों का कहना था कि वे पौन घंटे पहले ही आ गए थे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
 
इस बारे में सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों से पूछा गया तो उनका जवाब था कि वे इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं, उन्हें जो आदेश मिला है, उसके अनुसार वे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। यदि भीतर आयोजकों में किसी से परिचय है तो उनसे बात कर लीजिए। कई लोगों ने अपने परिचितों से बात भी की लेकिन बात नहीं बनी और वे निराशा और परेशानी में खड़े रहने के बाद लौटने लगे।

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