शिवराज के सामने धर्म संकट, पुलिस की कमान किसे सौंपें ?

PUBLISHED : May 05 , 7:40 AMBookmark and Share


शिवराज के सामने धर्म संकट, पुलिस की कमान किसे सौंपें ?
ऽ    डीजीपी के लिये रीना मित्रा, ऋषि शुक्ला या सरबजीत सिंह ?
ऽ    30 जून तक करना है निर्णय, एक दर्जन आई.पी.एस. प्रतीक्षा में ।

( डाॅ. नवीन आनंद जोशी )

भोपाल /    मध्यप्रदेश के पुलिस मुखिया सुरेन्द्र सिंह 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं । उनके स्थान पर नए डीजीपी की नियुक्ति करने का धर्म संकट शिवराज सिंह चैहान के सामने है । दरअसल शिवराज की पसंद सरदार सरबजीत सिंह हैं और वे 11 वरिष्ठ आई.पी.एस. से पीछे हैं जबकि सबसे वरिष्ठ एवं योग्य डीजीपी पद की उम्मीदवार रीना मित्रा हैं जिन्हें यदि कमान सौंपी जाती है तो यह पहला अवसर होगा जब राज्य की पुलिस प्रमुख कोई महिला बनेंगी ।
    केन्द्र में प्रतिनियुक्त और राज्य में तैनात आई.पी.एस. अफसरों में ऐसे कई नाम हैं जो डीजीपी के लिए लाॅबिंग में खुलकर सामने आ रहे हैं या गुपचुप तरीके से अपने आकाओं के जरिये खुद के नाम चलवा रहे हैं, जबकि मुख्यमंत्री की पसंद 1985 बेच के सरबजीत सिंह हैं जिन्होंने खुद अपने सीनियर्स को सुपरसीट न करने के कारण इस पद पर आने में फिलहाल अपनी असहमति जताई है । डीजीपी के लिए सबसे पहला नाम महिला आई.पी.एस. रीना मित्रा का है, जो 1983 बेच की आई.पी.एस. हैं, जिनका जन्म 9 जनवरी 1959 है और वह वर्तमान में स्पेशल डीजी पुलिस मुख्यालय पदस्थ हैं तथा लम्बे समय तक केन्द्र में विभिन्न पदों पर तैनात रही हैं वे हर तरह से इस पद के लिये योग्य हैं और जैसी कि मुख्यमंत्री की मंशा रही है कि दुनिया की आधी आबादी (महिला) को प्राथमिकता दी जाए, उस लिहाज से वह इस पद के लिए योग्य उम्मीदवार हैं । दूसरा नाम इन्हीं के पति डी.एन. मित्रा का भी है जो वर्तमान में केन्द्र में हैं और सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में शुमार हैं साथ ही ए.के. धस्माना जो 1981 बेच के अधिकारी हैं जिनका जन्म दिनांक 02.10.1957 है, जो केन्द्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं परन्तु वे अभी राज्य से दूरी बनाए हुए हैं और भोपाल आना नहीं चाहते हैं, अब बात करते हैं ऋषि कुमार शुक्ला की जो चेयरमेन के पद पर पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन भोपाल में पदस्थ हैं जिनका बेच भी 1983 का है उनका जन्म 23 अगस्त 1960 का है, किन्तु उनके ऊपर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में आई.ए.एस. गोपाल रेड्डी एवं कई अधिकारियों और नेताओं को भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में बचाने और क्लीनचिट देने के प्रमाणित आरोपी हैं और साथ ही थानेदारी की भर्ती के दौरान एक अन्य आई.पी.एस. अधिकारी के.एन. तिवारी के साथ भाई भतीजावाद के आरोपों में दागी हैं । ऐसे में उन्हें पुलिस प्रमुख बनाने के पूर्व मुख्यमंत्री को विचार करना पड़ेगा । इसके अतिरिक्त विजय कुमार सिंह जो जेल विभाग के डायरेक्टर जनरल हैं और 1984 बेच का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका जन्म 26.03.1961 का है यदि इन्हें डीजीपी बनाया जाता है तो ये वर्ष 2021 तक पद पर बने रह सकते हैं और ये निर्विवाद अधिकारी हैं । साथ ही अन्य योग्य और बेदाग छवि वाले अधिकारियों में वर्ष 1984 की बेच के व्ही.के. जौहरी जो केन्द्र की सेवा में हैं, मैथिलीशरण गुप्त डीजी होमगार्ड हैं तथा एक अन्य नाम जो गलियारों में गूंज रहा है वह है संजय चैधरी डायरेक्टर प्रोसीक्यूशन, तथा 1985 बेच के अशोक दोहरे आपदा प्रबंधन में होकर दागी अफसर हैं, एम.आर. कृष्णा जो केन्द्र में तैनात हैं और राजेन्द्र कुमार जो साइबर सेल में हैं इनके बाद सरदार सरबजीत सिंह का नंबर आता है । यानि यदि मुख्यमंत्री को सीधे अपनी पसंद सरदार जी को कमान देना है तो 11 अधिकारियों से सीधे छलांग लगाने के बाद उन्हें डीजीपी बनाया जा सकता है अन्यथा इस पद के लिये केवल रीना मित्रा की वरिष्ठता और योग्यता प्राथमिकता होगी । अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री अपने पुलिस मुखिया के लिये किसे चुनते    हैं

वीडियो

More News