डोपिंग में फंसे नरसिंह यादव को NADA से मिली क्लीनचिट, रियो ओलम्पिक जाएंगे

PUBLISHED : Aug 02 , 8:04 AMBookmark and Share





नई दिल्ली : डोपिंग मामले में फंसे रेसलर नरसिंह यादव को सोमवार को बड़ी राहत मिली। नाडा ने डोपिंग में फंसे नरसिंह को क्लीनचिट दे दी। नरसिंह ने कहा था कि डोपिंग में फंसाने के लिए उनके खिलाफ साजिश की गई। नरसिंह के इस दावे की जांच के बाद नाडा ने रेसलर को क्लीनचिट दी है। नाडा ने माना है कि नरसिंह के खिलाफ साजिश हुई। नाडा से क्लीनचिट मिल जान के बाद नरसिंह के रियो ओलंपिक जाने का रास्ता साफ हो गया है।
नरसिंह यादव पर प्रतिबंधित दवा लेने का आरोप था। नाडा ने कहा है कि नरसिंह यादव के खाने में मिलावट की गई थी।
पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे संदेह को खत्म करते हुए नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने नरसिंह को बरी करने का बयान पढ़ा जिसके बाद इस पहलवान के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

अग्रवाल ने इस फैसले को पढ़ते हुए कहा, ‘हमने बीते समय के (दो जून तक) के नमूने को ध्यान में रखा, जिसमें उसका कोई भी नमूना पाजीटिव नहीं पाया गया था। यह बात समझ से बाहर थी कि एक बार यह प्रतिबंधित पदार्थ लेने से फायदा होगा। इसलिये पैनल का विचार था कि एक बार लिया गया पदार्थ ‘जान बूझकर’ नहीं लिया गया था।’

उन्होंने साथ ही कहा, ‘पैनल ने कहा कि यह एथलीट नाडा की डोपिंग रोधी संहिता की 10.4 धारा के लाभ का हकदार है। यह ध्यान में रखते हुए कि वह साजिश का शिकार हुआ, पैनल ने नाडा के डोपिंग रोधी नियमों के आरोपों से उसे बरी कर दिया।’ जब आज यह फैसला लिया गया तो नरसिंह नाडा के मुख्यालय में उपस्थित थे। रियो जाने वाली टीम में उनकी जगह प्रवीण राणा को भेजने की घोषणा की गयी थी।

लेकिन भारतीय कुश्ती महासंघ ने कहा कि नरसिंह को अब टीम में वापस ले लिया जायेगा।

नाडा ने यह फैसला पिछले हफ्ते तीन दिन की मैराथन सुनवाई के बाद किया है जिसमें नरसिंह के वकीलों ने जिरह की कि इस पहवालन को विरोधियों द्वारा शिकार बनाया गया है। यहां तक कि नरसिंह ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने दो साथी पहलवानों का नाम लिया था जिसमें एक 17 वर्ष का है। नरसिंह को प्रतिबंधित पदार्थ मिथानाडाईनोन का पाजीटिव पाया गया था जिसके बाद इस पहलवान ने दावा किया था कि उसके खिलाफ साजिश की गयी है।

नाडा की कानूनी टीम ने भी अनुशासनात्मक समिति के समक्ष इस साजिश के आरोप के खिलाफ जिरह की और कहा कि खुद को डोपिंग मुक्त रखने की जिम्मेदारी नरसिंह की है। पैनल ने उसके खाने में प्रतिबंधित पदार्थ डालने की बात की पुष्टि करने के लिये शनिवार को नरसिंह के वकील विदुशपत सिंघानिया के अनुरोध पर दो रसोईयों को भी बुलाया था।

नरसिंह को डब्ल्यूएफआई ने दो बार के ओलंपिक पदकधारी सुशील कुमार पर तरजीह देते हुए रियो ओलंपिक के लिये चुना था क्योंकि उसी ने पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर 74 किग्रा वर्ग में ओलंपिक कोटा हासिल किया था। सुशील ने ट्रायल की मांग की थी जिसे महासंघ और दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ठुकरा दिया था।
पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे संदेह को खत्म करते हुए नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने नरसिंह को बरी करने का बयान पढ़ा जिसके बाद इस पहलवान के समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया।

अग्रवाल ने इस फैसले को पढ़ते हुए कहा, ‘हमने बीते समय के (दो जून तक) के नमूने को ध्यान में रखा, जिसमें उसका कोई भी नमूना पाजीटिव नहीं पाया गया था। यह बात समझ से बाहर थी कि एक बार यह प्रतिबंधित पदार्थ लेने से फायदा होगा। इसलिये पैनल का विचार था कि एक बार लिया गया पदार्थ ‘जान बूझकर’ नहीं लिया गया था।’

उन्होंने साथ ही कहा, ‘पैनल ने कहा कि यह एथलीट नाडा की डोपिंग रोधी संहिता की 10.4 धारा के लाभ का हकदार है। यह ध्यान में रखते हुए कि वह साजिश का शिकार हुआ, पैनल ने नाडा के डोपिंग रोधी नियमों के आरोपों से उसे बरी कर दिया।’ जब आज यह फैसला लिया गया तो नरसिंह नाडा के मुख्यालय में उपस्थित थे। रियो जाने वाली टीम में उनकी जगह प्रवीण राणा को भेजने की घोषणा की गयी थी।

लेकिन भारतीय कुश्ती महासंघ ने कहा कि नरसिंह को अब टीम में वापस ले लिया जायेगा।

नाडा ने यह फैसला पिछले हफ्ते तीन दिन की मैराथन सुनवाई के बाद किया है जिसमें नरसिंह के वकीलों ने जिरह की कि इस पहवालन को विरोधियों द्वारा शिकार बनाया गया है। यहां तक कि नरसिंह ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज की थी, जिसमें उन्होंने दो साथी पहलवानों का नाम लिया था जिसमें एक 17 वर्ष का है। नरसिंह को प्रतिबंधित पदार्थ मिथानाडाईनोन का पाजीटिव पाया गया था जिसके बाद इस पहलवान ने दावा किया था कि उसके खिलाफ साजिश की गयी है।

नाडा की कानूनी टीम ने भी अनुशासनात्मक समिति के समक्ष इस साजिश के आरोप के खिलाफ जिरह की और कहा कि खुद को डोपिंग मुक्त रखने की जिम्मेदारी नरसिंह की है। पैनल ने उसके खाने में प्रतिबंधित पदार्थ डालने की बात की पुष्टि करने के लिये शनिवार को नरसिंह के वकील विदुशपत सिंघानिया के अनुरोध पर दो रसोईयों को भी बुलाया था।

नरसिंह को डब्ल्यूएफआई ने दो बार के ओलंपिक पदकधारी सुशील कुमार पर तरजीह देते हुए रियो ओलंपिक के लिये चुना था क्योंकि उसी ने पिछले साल विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर 74 किग्रा वर्ग में ओलंपिक कोटा हासिल किया था। सुशील ने ट्रायल की मांग की थी जिसे महासंघ और दिल्ली उच्च न्यायालय ने लंबी कानूनी लड़ाई के बाद ठुकरा दिया था।

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