गोवा: फ्लोर टेस्ट से पहले एक और विधायक का पर्रिकर को मिला समर्थन

PUBLISHED : Mar 15 , 7:11 AMBookmark and Share




गोवा मंत्रिपरिषद में युवा, अनुभवी, दोनों को मिली जगह

गोवा में मनोहर पर्रिकर नीत मंत्रिपरिषद में युवाओं और अनुभवी, दोनों तरह के लोगों को शामिल किया गया है। साथ ही, क्षेत्रीय पार्टियों से भी मजबूत प्रतिनिधित्व है जो भाजपा शासित गठजोड़ में अहम सहयोगी दल हैं। पर्रिकर ने नौ विधायकों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने राज्य में महत्वपूर्ण तबकों को प्रतिनिधित्व देकर एक उत्कष्ट संतुलन कायम रखने की कोशिश की है। 

नौ मंत्रियों में भाजपा से दो, गोवा फारवर्ड पार्टी (जीएफपी) से तीन, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) से दो और इतनी ही संख्या में निर्दलीय हैं। प्रख्यात एमजीपी नेता सुदीन धावलिकर एक क्षेत्रीय कद्दावर नेता हैं। एमजीपी का 2012 के चुनाव के दौरान भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन था। इसने भाजपा से संबंध तोड़ लिया और चार फरवरी को विधानसभा चुनाव शिवसेना तथा नव गठित गोवा सुरक्षा मंच के साथ गठजोड़ कर लड़ा। धावलिकर भाजपा नीत पिछले गठबंधन में भी मंत्री रह चुके हैं।

सरदेसाई ने जीएफपी के गठन में अहम भूमिका निभाई थी जो जनवरी 2016 में अस्तित्व में आई। भाजपा के फ्रांसिस डीसूजा (62) की भी सरकार में वापसी हुई है। वह भाजपा का अल्पसंख्यक चेहरा रहे हैं। 

मनोहर असगावंकर कांग्रेस से एमजीपी में शामिल हुए थे और चुनाव में जीत हासिल की। पांडुरंग माडकैकर उन दो पूर्व कांग्रेसी विधायकों में शामिल हैं जो चुनाव से पहले भाजपा में शामिल हुए थे। वह उन दो भाजपा विधायकों में शामिल हैं जिन्हें पर्रिकर कैबिनेट में जगह मिली है।

निर्दलीय चुने गए रोहन खाउंते को भी मंत्रालय में शामिल किया गया है।

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