दूसरे राज्य के निवासी से भी विवाह करने पर दिव्यांगों को मिलेगी मदद

PUBLISHED : Jan 11 , 9:25 AMBookmark and Share



डॉ. नवीन जोशी
भोपाल।अब प्रदेश के बाहर के राज्य के निवासी से भी विवाह करने पर दिव्यांगों को प्रोत्साहन राशि मिल सकेगी। इस संबंध में राज्य शासन ने सभी जिला कलेक्टरों कों निर्देश जारी कर दिये हैं।
दरअसल राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री नि:शक्तजन विवाह प्रोत्साहन योजना नियम जारी किये हुये हैं। इस योजना के क्रियान्वयन में कुछ जिलों ने राज्य शासन से पूछा था कि उक्त योजना में दंपत्ति में से किसी एक का अन्य राज्य का निवासी होने पर उसे योजना का लाभ दिया जाये या नहीं तथा कितनी राशि का भुगतान किया जाये। इस पर राज्य सरकार ने नवीन निर्देश जारी कहा है कि उक्त योजना का मुख्य उद्देश्य मप्र के दिव्यांगजनों के सामाजिक पुनर्वास हेतु उनके विवाह को प्रोत्साहित करना है। इसलिये दम्पत्ति में से यदि एक जीवन साथी जो मप्र राज्य का निवासी हो एवं दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अनुसार जिसका दिव्यांगता न्यूनतम 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो, के द्वारा राज्य के बाहर के दिव्यांग से विवाह किये जाने पर प्रोत्साहन राशि एक लाख रुपये तथा राज्य के बाहर के शारीरिक रुप से सामान्य व्यक्ति से विवाह किये जाने पर प्रोत्साहन राशि दो लाख मप्र के निवासी को उक्त दिव्यांग द्वारा आवेदन किये जाने पर उसके बैंक खाते में जमा की जाये।
बसों में नहीं मिल रही 50 प्रतिशत छूट :
इधर राज्य की यात्री बसों में प्रदेश के दिव्यांगजनों को किराये में पचास प्रतिशत की छूट भी नहीं दी जा रही है। जबकि राज्य के परिवहन विभाग ने 27 अक्टूबर 2016 को आदेश जारी किये थे बस आरेटरों द्वारा यह छूट दी जाये। परन्तु उनके द्वारा इसका पालन नहीं किया जा रहा है। प्रदेश के आयुक्त नि:शक्तजन ने इस पर संज्ञान लेते हुये राज्य सरकार को लिखा है कि अनेक दिव्यांगजनों ने यह छूट न दिये जाने की शिकायत की है। यदि बस आपरेटर यह छूट नहीं दे रहे हैं तो उनके विरुध्द कार्यवाही की जाये। इस पर अब राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों से कहा है कि वे इस छूट को देने के आदेश का पालन करायें।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि दूसरे राज्य के निवासी से विवाह करने पर भी नि:शक्तजनों को योजना का लाभ दिया जाये, इसके बारे में निर्देश जारी किये गये हैं। दिव्यांगजनों को सभी प्रकार की यात्री बसों में किराये में पचास प्रतिशत की छूट के प्रावधान का पालन करने के लिये भी जिला कलेक्टरों से कहा गया है।


16 एवं 17 जनवरी को होगी विधानसभा की बैठक
शीतकालीन सत्र का ही हिस्सा होगा यह सत्र

भोपाल।संविधान संशोधन विधेयक के अनुसमर्थन हेतु मप्र विधानसभा की बैठकें 16 एवं 17 जनवरी, 2020 को आयोजित की गई हैं। सभा की इन बैठकों में उक्त  के अतिरिक्त अन्ये कोई कार्य संपादित नहीं किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित संविधान (एक सौ छब्बीसवां संशोधन) विधेयक, 2019 के अनुसमर्थन हेतु मप्र विधानसभा की यह बैठकें बुलाई गई हैं, जिसमें संविधान संशोधन विधेयक के अनुसमर्थन संबंधी संकल्प  का प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाएगा तथा समवेत विधानसभा उस पर विचार करेगी।
शीतकालीन सत्र का ही हिस्सा है यह :
16 एवं 17 जनवरी को होने वाला यह सत्र पिछले शीतकालीन सत्र का ही हिस्सा होगा। दरअसल गत 17 से 20 दिसम्बर तक चले शीतकालीन सत्र का राज्यपाल लालजी टण्डन ने सत्रावसान नहीं किया था। इसी कारण से आने वाला सत्र इसी का हिस्सा होगा। इसमें मीडिया आदि के प्रवेश-पत्र वही रहेंगे जो दिसम्बर के सत्र में बने थे।
विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि 16 एवं 17 जनवरी का सत्र पिछले शीतकालीन सत्र का ही हिस्सा होगा, क्योंकि राज्यपाल ने सत्रावसान नहीं किया था। दिसम्बर के शीतकालीन सत्र की अधिसूचना राज्यपाल ने ही जारी की थी परन्तु उन्होंने सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं की थी। इसी कारण से 16 एवं 17 जनवरी के सत्र को बुलाने की पुन: राज्यपाल से अधिसूचना नहीं जारी करवाई गई है बल्कि विधानसभा सचिवालय ने ही स्पीकर के अनुमोदन से यह सत्र आयोजित कर लिया है। चूंकि यह सत्र इस साल का नया सत्र नहीं है इसलिये इसमें परम्परानुसार राज्यपाल का अभिभाषण नहीं रखा गया है। राज्यपाल का अभिभाषण अगले बजट सत्र में ही होगा।
डॉ. नवीन जोशी

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