अब मप्र सरकार अपनी योजनाओं में आधार अनिवार्य करेगी

PUBLISHED : Jul 19 , 8:55 AMBookmark and Share



सभी विभागों को निर्देश जारी हुये

डॉ नवीन जोशी
भोपाल।
अब मप्र सरकार अपनी सभी योजनाओं में हितग्राहियों से आधार नम्बर लिया जाना अनिवार्य करने जा रही है। इसके लिये वित्त विभाग ने सभी विभागों के प्रमुखों को निर्देश जारी कर दिये हैं। यह कार्यवाही भारत सरकार के केबिनेट सचिवालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देश पर की जा रही है।
राज्य के सभी विभागों से कहा गया वे भारत सरकार एवं राज्य सरकार की योजना एवं कार्यक्रम की सूची बनायें। योजना में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रासंफर यानी डीबीटी लागू करने का आकलन किया जाये जिसमें उद्देश्य लक्षित हितग्राही, योजना क्रियान्वयन और फण्डफ्लो सम्मिलित हो। आधार कानून 2016 के तहत राज्य की संचित निधि से पोषित योजनाओं में आधार सीडिंग हेतु अधिसूचना जारी करने की कार्यवाही की जाये। केंद्र सरकार एवं राज्य की संचित निधि से हितग्राही मूलक पोषित योजनाओं के वर्तमान हितग्राहियों को डिजिटाईजेशन किया जाये, उनकी आधार सीडिंग एवं उपलब्ध डाटाबेस का आधार आधारित सत्यापन का कार्य पूर्ण किया जाये एवं विभागीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों के लिये ऐसी प्रक्रिया/साफ्टवेयर तैयार किया जाये जिसके द्वारा नवीन जोड़े जाने वाले हितग्राही को योजना में सम्मिलित करते समय/आवेदन के साथ ही आधार सीडिंग की जा सके एवं मोबाईल नंबर दर्ज किया जा सके। वस्तु वितरण में आधार के माध्यम से हितग्राहियों का सत्यापन किया जाये।
सभी विभागों से यह भी कहा गया है कि प्रत्येक विभाग की योजनाओं में डीबीटी के क्रियान्वयन के लिये विभाग द्वारा एक टीम का गठन किया जाये जिसमें तकनीकी नोडल अधिकारी, एक गैर तकनीकी नोडल अधिकारी तथा एक वित्त नोडल अधिकारी नामांकित किया जाये और इससे संचालनालय कोष एवं लेखा को अवगत कराया जाये।

अब कंपनियों के डायरेक्टर वीडियो कान्फे्रन्सिंग से भी बोर्ड की बैठकों में भाग ले सकेंगे
भोपाल।
अब कंपनियों के डायरेक्टर वीडियो कान्फे्रन्सिंग से भी बोर्ड की बैठकों में भाग ले सकेंगे। इस संबंध में भारत सरकार ने कंपनी अधिनियम 2013 के तहत बने नियमों में संशोधन कर उसे सोमवार से प्रभावशील कर दिया है। नवीन संशोधन में कहा गया है कि कोई निदेशक जो इलेक्ट्रानिक मोड के माध्यम से बैठक में भाग लेना चाहता है, वह कैलेण्डर वर्ष के प्रारंभ में ही ऐसी भागीदारी के विषय में सूचित कर सकता है और ऐसी घोषणा एक वर्ष के लिये विधि मान्य होगी। परन्तु ऐसी घोषणा से उसे वैयक्तिक रुप से बैठक में भाग लेने से नहीं रोका जायेगा, जिसके लिये संबंधित निदेशक कंपनी को वैयक्तिक रुप से भाग लेने के उसके आशय की अग्रिम सूचना देगा। सरकार ने एक नया प्रावधान यह भी किया है कि अब कंपनी बोर्ड की बैठक में बहुमत से लिये गये निर्णय के मसौदे के कार्यवृत्त की पुष्टि होने तक कंपनी द्वारा संरक्षित रखा जायेगा।
डॉ नवीन जोशी

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