श्री श्री के कार्यक्रम को मिली मंजूरी, 5 करोड़ का जुर्माना भी लगा

PUBLISHED : Mar 10 , 8:13 AMBookmark and Share




नई दिल्ली। यमुना नदी के किनारे होने वाले श्री श्री रविशंकर के प्रोग्राम को मंजूरी मिल गई है। कार्यक्रम के आयोजन के खिलाफ राष्ट्रीय हरित न्यायाधीकरण (एनजीटी) में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका कि सुनवाई करते हुए एनजीटी ने

कार्यक्रम को मंजूरी देते हुए कुछ शर्तें भी लगाई है। एनजीटी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन के बाद यमुना किनारे की साफ-सफाई की जिम्मेदारी आर्ट ऑफ लिविंग की होगी।

एनजीटी ने ऑर्ट ऑफ लिविंग फॉउंडेशन पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना पर्यावरण क्षति पूर्ति के तौर पर लगाया है। उसने कहा है कि यमुना के जल ग्रहण क्षेत्र में इस तरह के आयोजन से नदी की पारिस्थितिकी को बहुत नुकसान पहुंचेगा ऐसे में इसकी जिम्मेदारी फाउंडेशन को ही वहन करनी होगी। इसके साथ ही उसने इस मामले में गैर जिम्मेदार रवैया अपनाने के लिए डीडीए पर पांच लाख रुपए और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर एक लाख का जुर्माना लगाने का आदेश भी सुनाया।

हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने से पहले आर्ट ऑफ लिविंग को अग्निशमन विभाग से मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले, 11 मार्च से शुरू हो रहे तीन दिवसीय इस कार्यक्रम को लेकर बुधवार को राज्यसभा में जमकर हंगामा हुआ। सीपीएम के नेता सीताराम येचुरी ने पूछा कि श्री श्री रविशंकर के इस निजी कार्यक्रम में सेना क्यूं मदद कर रही है। इस प्रश्न को लेकर ही सदन में हंगामा हुआ। प्रश्न का जवाब देते हुए संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि एनजीटी मामले

की सुनवाई कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि श्री श्री रविशंकर पर्यावरण की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उल्लेखनीय है कि यमुना किनारे होने वाले इस कार्यक्रम के लिए सेना पुल बना रही है और इस मामले को लेकर भी विवाद है।

एनजीटी ने आयेाजन पर रोक की मांग वाली 'यमुना जिएà के मनोज मिश्रा की याचिका पर वन एंव पर्यावरण मंत्रालय, जल संसाधन मंत्रालय, दिल्ली विकास प्राधिकरण और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी देखने वाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की एजेंसियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। इन सभी पक्षों ने अदालत के समक्ष पेश हलफनामें में सामारोह के आयेाजन को मंजूरी देने के अपने अधिकार क्षेत्र पर अलग-अलग तर्क पेश किए। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने कहा कि उसने आयोजन के लिए कोई मंजूरी नहीं दी थी। डीडीए ने आयेाजन का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि यह इतने बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

सब पल्ला झाड़ रहे

जल संसाधन मंत्रालय ने कहा कि उसने इस तरह की कोई मंजूरी नहीं दी, जबकि वन एंव पर्यावरण मंत्रालय का जवाब था कि उससे कोई मंजूरी मांगी ही नहीं गई थी। दिल्ली सरकार ने कहा कि इस आयोजन के लिए पुलिस और अग्निशमन विभाग से कोई मंजूरी नहीं ली गई। एनजीटी ने तमाम पक्षों की ओर से पेश इस दलील पर तल्ख टिप्पणी करते हुए बुधवार को कहा, आप लोग हमारे सब्र का इम्तहान नहीं लें। उसने कहा कि सभी ने एक ही जवाब तैयार कर लिया है कि 'हमें नहीं पता।' सब अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।

आंकलन करना चाहिए था

अदालत ने इस मामले में वन एंव पर्यावरण मंत्रालय की खिंचाई करते हुए कहा कि क्या उसे नहीं लगता कि ऐसे बड़े आयोजन के मामले में उससे मंजूरी ली जानी चाहिए थी। दिल्ली प्रदूषण ङ्क्षनयत्रण बोर्ड पर भी खास नाराजगी जताते हुए

एनजीटी ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण की जिम्मेदारी संभालने वाली इकाई के तौर पर, आपकी क्या जिम्मेदारी बनती है। क्या आपने एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए इतने बड़े अस्थायी ढांचे का निर्माण पहले कभी देखा है। क्या आपको इससे

यमुना नदी पर पडऩे वाले प्रभाव का आंकलन नहीं करना चाहिए था।

इस बीच ऑर्ट ऑफ लिङ्क्षवग ने महोत्सव के आयोजन को लेकर उठ रहे विवाद पर एनजीटी में दी गई अपनी दलील में कहा कि समारोह के लिए सभी नियामक मंजूरी ले ली गई है और इस आयेाजन से युमना की पारिस्थितिकी को कोई नुकसान नहीं होगा। एनजीटी ने इस तर्क को स्वीकार नहीं करते हुए नदी के पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के लिए उस पर पांच करोड़ रुपए का जुर्माना ठोंक दिया। एनजीटी ने कहा है कि यमुना नदी के पानी से उठने वाली बदबू को खत्म करने के लिए आयोजकों की ओर से उसमें गिरने वाले नालों में हजारों लीटर जो इको एन्जाइम डाला जाने वाला है उसकी जांच भी नहीं की गई है। ऐसे में इस एन्जाइम से यमुना के जल पर क्या असर पड़ेगा इसकी जिम्मेदारी आयोजको को ही लेनी होगी।

एनजीटी ने आयोजकों की ओर से महोत्सव पर कुल 25 करोड़ 63 लाख रुपए खर्च किए जाने का ब्यौरा देने पर भी तल्ख टिप्पणी की और कहा, आप एक आयेाजन पर इतना पैसा खर्च कर सकते हैं तो फिर आपको बड़ी राष्ट्रीय परियोजनाओं

का काम संभाल लेना चाहिए। इस बीच लोक निर्माण विभाग की ओर से अदालत में यह खुलासा करने पर कि नदी किनारे सात एकड़ क्षेत्र में बनाया जाने वाला विशाल मंच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए सुरक्षित नहीं है, अदालत ने इस बारे में

आयोजकों से सवाल किया। उनके इस जवाब पर कि यह मिट्टी पर बनाया जा रहा है, एनजीटी ने कहा कि जहां इसे बनाया गया है वहां मिट्टी तो है ही नहीं, ऐसे में यह चालीस फुट ऊंचा मंच बालू पर ही बनाया जा रहा होगा, जो निश्चित रुप से सुरक्षित नहीं हो सकता।

सभी धर्मों, समुदायों को एक साथ लाने का प्रयास

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