जिला अभियोजन अधिकारियों को नया फरमान..

PUBLISHED : Feb 02 , 9:12 AMBookmark and Share



माह में एक बार कलेक्टर और दो बार एसपी से मिलें

डॉ. नवीन जोशी

भोपाल।राज्य के गृह विभाग के अधीन कार्यरत लोक अभियोजन संचालनालय के महानिदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने अपने सभी जिला अभियोजन अधिकारियों को नया फरमान जारी किया है। इस फरमान के तहत अब जिला अभियोजन अधिकारियों को माह में एक बार अपने जिले के कलेक्टर से और माह में दो बार पुलिस अधीक्षक से मिलना होगा।

उचित समन्वय न होना बताया कारण :

फरमान में महानिदेशक ने कहा है कि अभियोजन कार्यालयों की कार्य समीक्षा के दौरान यह तथ्य संज्ञान में आया है कि जिला अभियोजन कार्यालयों का वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उचित समन्वय का अभाव है, जिससे जिला स्तर पर उचित कार्य संस्कृति का विकास नहीं हो पा रहा है।
कलेक्टर से मिलकर यह बतायेंगे :

फरमान में कहा गया है कि समस्त जिला अभियोजन अधिकारीगण जिला कलेक्टर से व्यक्तिश: मासिक आधार पर भेंट करें एवं कलेक्टर का आपराधिक प्रकरणों के संबंध में वांछित जानकारी उपलब्ध करायें तथा प्रकरणों के समुचित संचालन हेतु कलेक्टरों को अपेक्षित सहयोग के संबंध में अवगत करायें।

एसपी को कोर्ट केसेज बतायेंगे :

फरमान में कहा गया है कि जिला अभियोजन अधिकारी पाक्षिक आधार पर अपने जिले के पुलिस अधीक्षक से व्यक्तिश: भेंट कर उन्हें न्यायालयों के विचारधीन महत्वपूर्ण प्रकरणों की प्रगति एवं प्रकरणों के संचालन में पुलिस से अपेक्षित सहयोग बाबत तथ्य बतायें। साथ ही पुलिस अधीक्षक से भेट के दौरान उन्हें जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरणों, महिला अपराध संबंधी प्रकरण एवं महत्वपूर्ण राजनैतिक प्रकरणों के संबंध में आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करायें।
इस फरमान की सूचना महानिदेशक ने सभी जिलों के कलेक्टरों एवं पुलिस अधीक्षकों को भी दी है ताकि  वे ध्यान रख सकें कि कितने अभियोजन अधिकारी उनके पास व्यक्तिश: भेंट हेतु आ रहे हैं।


प्रदेश की पांच छावनी परिषदों के
उपाध्यक्ष एवं पार्षदों का मानदेय बढ़ा

भोपाल।भारत सरकार ने देशभर की छावनी परिषदों यानि केन्टोनबोर्ड के निर्वाचित उपाध्यक्षों एवं पार्षदों के मानदेय में वृध्दि कर दी है। इनमें मप्र की पांच छावनी परिषदें यथा जबलपुर, पचमढ़ी, महू, सागर एवं मुरार भी शामिल हैं।प्रदेश की जबलपुर, महू एवं पचमढ़ी छावनी परिषदें केटेगरी वन में आती हैं। इनमें अब प्रति माह उपाध्यक्ष को दस हजार रुपये मानदेय, वाहन भत्ता 1250 रुपये एवं टेलीफोन भत्ता 320 रुपये मिलेगा जबकि पार्षदों को प्रति माह 8 हजार रुपये मानदेय, वाहन भत्ता 1250 रुपये एवं टेलीफोन भत्ता 320 रुपये मिलेगा।इसी प्रकार प्रदेश की सागर एवं मुरार छावनी परिषदें केटेगरी टू में आती हैं जिनमें अब उपाध्यक्ष को 8 हजार रुपये एवं पार्षद को 6 हजार रुपये प्रति माह मानदेय दिया जायेगा  जबकि दोनों को प्रति माह वाहन भत्ता एक हजार रुपये एवं टेलीफोन भत्ता 320 रुपये मिलेगा।
डॉ. नवीन जोशी

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