महाविजय के महानायक बने मोदी और शाह, गठबंधन तंत्र पर भारी पड़ा मोदी मंत्र

PUBLISHED : May 24 , 7:42 AMBookmark and Share


महाविजय के महानायक बने मोदी और शाह, गठबंधन तंत्र पर भारी पड़ा मोदी मंत्र

यह मोदी की महाविजय है। देश की जनता में मोदी मंत्र, विपक्ष के गठबंधन तंत्र पर भारी पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह विपक्ष के दर्जन भर से ज्यादा बड़े नेताओं और क्षत्रपों पर बहुत भारी पड़े। कुछ राज्यों के हेर फेर को छोड़ दें तो 2019 में भाजपा 2014 से आगे बढ़ी है। भाजपा ने पूरे चुनाव में दो नारों पर काम किया। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ व ‘अबकी बार तीन सौ पार’। पूरे चुनाव अभियान में उम्मीदवार कौन है यह पीछे रह गया।

भाजपा ने  माहौल बनाया कि हर सीट पर मोदी चुनाव लड़ रहे हैं। विपक्ष के पास इस रणनीति का काट नहीं था। हालांकि कुछ सीटों पर उसने सामाजिक समीकरणों के चलते भाजपा को रोकने की कोशिश जरूर की, लेकिन वह असफल रहा। 

लोकसभा चुनाव नतीजों के केंद्र में दो ही बातें महत्वपूर्ण है। एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिनकी सरकार के कामकाज, कड़े व बड़े निर्णय जनता में गहरी पैठ बना गए। वहीं, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की बूथ स्तर तक की मजबूत सांगठनिक तैयारी, जिसके सामने विपक्ष की सारी तरकीबें असफल रहीं। भाजपा ने मिशन 2019 की तैयारी 2014 के आखिर से ही शुरू कर दी थी। जब अमित शाह ने भाजपा की कमान संभालते ही ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का नारा दिया और पूर्वोत्तर से लेकर कोरोमंडल राज्यों का अपना मिशन बनाया। इसके केंद्र में पश्चिम बंगाल और ओडिशा प्रमुख थे।

::: जीत के प्रमुख नारे:::::

-अबकी बार तीन सौ पार
-मोदी है तो मुमकिन है
-मैं भी चौकीदार
-एक बार फिर मोदी सरकार

दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा :

इतनी बड़ी सफलता के लिए शाह ने भाजपा को सांगठनिक रूप से मजबूत किया और दो साल में ही भाजपा को 11 करोड़ सदस्यों वाली दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बना लिया। इतने बड़े संगठन के साथ मोदी के नेतृत्व में शाह ने पंचायत से लेकर संसद तक के मिशन को शुरू किया। छह राज्यों में राजग की सरकारों से शुरू हुआ सफर इन पांच सालों में 22 राज्यों की सरकारों तक पहुंचा दिया। जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में गठबंधन टूटने और मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़, राजस्थान में हार के बाद लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के 12 मुख्यमंत्रियों के साथ राजग की 17 सरकारें हो गई थी।

बड़े व कड़े निर्णय बने सहायक :

मोदी-शाह की जोड़ी ने सरकार व संगठन स्तर पर बड़े व कड़े निर्णय लिए और वे लोकसभा चुनावों तक जारी रहे। सरकार के स्तर पर नोटबंदी, जीएसटी, सीर्जकल स्ट्राइक, बालाकोट के जबाब में एयर स्ट्राइक, राफेल सौदा, तीन तलाक रोकने, एनआरसी जैसे फैसलों के साथ संगठन स्तर पर बूथ, विस्तारक व वॉलंटियर की अभेद्य रचना की गई जो विपक्ष की समझ से परे रही। सरकार से लेकर लोकसभा उम्मीदवारों में 75 प्लस का फॉर्मूला लागू करने में भी नए नेतृत्व को आगे लाने का फैसला किया।

बंगाल और ओडिशा में भाजपा बनी ताकत :

पांच सालों में मोदी-शाह ने त्रिपुरा में वाम गढ़ ढहाया तो बंगाल में ममता को घर में घुस कर चुनौती दी। ओडिशा में नई जगह बनाई। दक्षिण कुछ कमजोर पड़ा, लेकिन संगठन स्तर पर जो तैयारी है वह पांच सालों में रंग दिखाएगी। उत्तर प्रदेश में महागठबंधन व बिहार के गठबंधनों को परास्त किया, वहीं छह महीने बने कांग्रेस के हाथ लगे तीन राज्यों में भी उसका लगभग सूपड़ा साफ कर दिया।

पूरे पांच साल की तैयारी :

लोकसभा चुनावों की तैयारी भाजपा ने काफी समय पहले से शुरू कर दी थी। देश भर में उसने 161 संवाद केंद्र (काल सेंटर) बनाए, इनमें 15682 वॉलंटियर से 24.18 करोड़ लाभार्थियों से संपर्क कर उनको बताया कि मोदी सरकार ने उनत तय यह योजना पहुंची है। 9.38 करोड़ एसएमएस भेजे गए, 10.25 करोड़ ओबीडी के जरिए संपर्क किया गया। 2566 पूर्णकालिक विस्तारक एक साल से ज्यादा समय से विभिन्न विधानसभा सीटों पर काम कर रहे हैं। लोकसभा क्षेत्रों में 442 विस्तारक व सभी के साथ दस सह विस्तारक की टीम बनाई गई थी।

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