प्रदेश में अब निजी क्षेत्र कृषि भूमि पर पर्यटन केंद्र बनायेगा

PUBLISHED : Jul 01 , 8:17 AMBookmark and Share



मप्र सरकार द्वारा भूमि विकास नियमों में संशोधन का प्रारुप जारी
डॉ नवीन जोशी
भोपाल।
प्रदेश में अब निजी क्षेत्र कृषि भूमि पर कृषि पर्यटन केंद्र स्थापित कर सकेगा। इसके लिये मप्र सरकार ने भूमि विकास नियम 2012 में संशोधन का प्रारुप जारी कर दिया है तथा अगले माह के पखवाड़े के बाद ये नियम प्रभावशील हो जायेंगे।
नये प्रारुप नियमों के अनुसार, कृषि पर्यटन सुविधा कृषि उपयोग के लिये उपप्रदर्शित कृषि क्षेत्र में नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय कृषि पर्यटन सुविधा की अनुमति प्रदान करेगा। इसके लिये कतिपय शर्तें भी निर्धारित की गईं हैं यथा भूखण्ड का न्यूनतम आकार एक हैक्टेयर होगा। अधिकतम तल क्षेत्र अनुपात यानी एफएआर 0.10 होगा। झलुआ छत सहित संरचना की अधिकतम ऊंचाई 7.5 मीटर होगी। सभी ओर न्यूनतम खुला यानी एमओएस 7.5 मीटर होगा। भूखण्ड हेतु पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई 7.5 मीटर होगी।
यह हो सकेगा कृषि पर्यटन सुविधा में :
कृषि फार्म, फूलोद्यान, फलोद्यान, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मछली पालन, सेरीकल्चर, कैंपिंग सुविधायें, अस्तबल, कला प्रदर्शनी के लिये हॉल, पर्यटकों के लिये कॉटेज, रेस्टोरेंट, योगा हॉल, प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र, खेल सुविधा, गिम्ट शाप जिसका अधिकतम क्षेत्र 50 वर्गमीटर से अधिक न हो, रखरखाव के लिये कर्मचारी आवास, स्वीमिंग पूल और केवल निवासरत पर्यटकों के मनोरंजन हेतु ओपन एरिया।
''प्रदेश में पहली बार कृषि भूमि पर पर्यटन सुविधा विकसित करने की तैयारी है। इसके लिये जिला कार्यालय मास्टर प्लान के अनुसार अनुमति देंगे। इसी कारण से भूमि विकास नियमों में संशोधन का प्रारुप जारी किया गया है।ÓÓ
- संदीप यादव संचालक नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल

सात नेता प्रतिपक्ष ही सीएम बन पाये
भोपाल।
मप्र विधानसभा का वर्ष 1956 से अब तक का इतिहास देखा जाये तो सात नेता प्रतिमपक्ष ही मुख्यमंत्री बन पाये हैं। इनमें द्वारका प्रसाद मिश्र तो सीएम बनने के बाद नेता प्रतिपक्ष बने। शेष वीरेन्द्र कुमार सखलेचा, श्यामाचरण शुक्ल, कैलाश जोशी, अर्जुन सिंह, सुंदरलाल पटवा तथा बाबूलाल गौर नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद सीएम बने। वर्तमान नेता प्रतिपक्ष सत्यदेव कटारे के पहले वीवाय तामस्कर, चन्द्र प्रताप तिवारी, वसंत सदाशिव प्रधान, विक्रम वर्मा, गौरीशंकर शेजवार, जमुना देवी तथा अजय सिंह ऐसे नेता प्रतिपक्ष रहे जो सीएम नहीं बन पाये। यूं कहा जाये कि बाबूलाल गौर के बाद अब तक ऐसा कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं रहा जो सीएम के पद तक पहुंचा हो।
डॉ नवीन जोशी

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