सिंहस्थ 2016 लूट खसोट के कई कीर्तिमान

PUBLISHED : May 26 , 6:50 AMBookmark and Share



0    टेण्डर के नाम पर ठगी, प्रबंधन के नाम पर कमीशनखोरी
0    सिंहस्थ के सत्यानाशी पर कब होगी कार्यवाही
( डॉ. नवीन आनंद जोशी )
    सनातन समाज के सबसे भव्य आयोजन सिंहस्थ महाकुंभ 2016 के समापन के साथ ही श्रेय लूटने और उसके सफल होने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है लेकिन इसलियत में यह कुंभ सरकारी लूट के सभी कीर्तिमान ध्वस्त करने वाला साबित हुआ है ।
    सिंहस्थ के आयोजन पर 5500 करोड़ के खर्चे का सरकारी दावा सामने आया है । यदि कुल श्रद्धालु एक करोड़ की संख्या में एक महीने में पहुँचे हैं तो उसके अनुसार एक श्रद्धालु पर 5500 रूपये का अनुमानित व्यय पहली नजर में होना परिलक्षित होता है । सिंहस्थ की तैयारियों में ही भ्रष्टाचार नजर आया था जब घटिया निर्माण, फर्जी ठेके, अस्थायी शौचालय, सेन्ट्रल लाईटें, घाटों की पुताई, खेतों का समतलीकरण और अन्य तात्कालिक कामों पर 2000 करोड़ के लगभग व्यय प्रभारी मंत्री भूपेन्द्र सिंह के द्वारा कराया गया । बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की ब्रांडिंग पर 500 करोड़ का व्यय यह बताता है कि कुंभ नहीं कोई आम चुनाव हो रहा है, जिसमें शिवराज अकेले ही प्रत्याशी हैं । मेला क्षेत्र में 750 प्याऊ लगी जिन्हें आर.ओ. युक्त पानी देना था, एक प्याऊ को 2.50 लाख रूपये में बनना था । 210 प्याऊ के अलावा अधिकांश प्याऊ पर लोहे के ढांचों पर मुख्यमंत्री का चित्र नजर आया । सिंहस्थ का कचरा 1000 टन प्रतिदिन के मान से 40 करोड़ रूपये में ठेका दिया गया । यानि सिंहस्थ में 5 करोड़ लोग आए तो एक व्यक्ति पर 8 रूपये खर्च और प्रत्येक व्यक्ति पर 600 ग्राम कचरा होना दिखा ।
    सफाई के नाम पर वाहन खरीदे । ड्रायवरों का वेतन, डीजल, अन्य के लिये 100 करोड़ रूपये खर्च होना बताया गया । शहर में एक पुल बना था जिसे जीरो प्वाइंट का पुल कहते हैं उस पुल की पुताई का ठेका एक करोड़ रूपये में नरेन्द्र मिश्रा नामक ठेकेदार को दिया गया । जबकि पुल निर्माण की लागत 9 करोड़ रूपये थी । क्षिप्रा नदी पर 5 करोड़ की लागत से बनने वाला एक पुल 15 करोड़ में बनाया गया । लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री केलकर और सहायक यंत्री कोमल भूतड़ा दोनों पहले भ्रष्टाचार के मामले में हटाये गये थे उन्हें ही पूरे निर्माण की जिम्मेदारी दी गई । कोमल भूतड़ा ने 10 करोड़ रूपये केवल समतलीकरण के नाम पर उदरस्थ कर लिये । मेसर्स यशनंद इंजीनियरिंग एण्ड कान्ट्रेक्टर्स को 66,44,17000 का ठेका 450 बेड के अस्पताल का वर्ष 2014 में दिया गया था जिसे 2015 में पूरा होना था लेकिन यह निर्माण 93.10 करोड़ में पूरा हुआ और सिंहस्थ प्रारंभ होने के 10 दिन पूर्व मुख्यमंत्री ने इसका लोकार्पण किया । सिंहस्थ 2004 के अधूरा काम छोड़कर भागने वाले ब्लेक लिस्टेड ठेकेदार श्री सिंटेक्स को 36 करोड़ में अस्थायी शौचालय निर्माण का काम दिया गया था जिसे बाद में 170 करोड़ रूपये में परिवर्तित कर दिया गया । पूरे कुंभ में यह शौचालय भ्रष्टाचार की चर्चा के केन्द्र में बना रहा । यही नहीं मुख्यमंत्री जी के सचिव विवेक अग्रवाल ने दक्षिण भारत से बगैर टेण्डर के 36 करोड़ के वाशरूम के ढांचे भी यहाँ लाकर लगवा दिये । लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के द्वारा सिवरेज ट्रीटमेन्ट प्लान्ट फरीदाबाद की स्टील इंजीनियरिंग कम्पनी को दिया गया । जिसकी पूर्व में लागत 54 लाख रूपये थी । बाद में इसे 1.10 करोड़ कर दिया गया । यह ग्राम सदावल में ड्रेजिंग मशीन से 30,000 क्यूबिक मीटर गाद निकालने का काम था ।
    सिंहस्थ के एक अन्य सत्यानाशी सुरेश तिवारी सरकार के प्रचार तंत्र के सलाहकार के रूप में भारी भरकम खर्चे पर भोपाल से उज्जैन भेजे गये, लेकिन वे एक भी दिन नजर नहीं आए उल्टे सात समुन्दर पार अपने रिश्तेदार के पास बैठकर कुंभ का तमाशा देखते रहे । उन्होंने इस दौरान जनसंपर्क विभाग को लाखों के बिल, वाहन, आवास, भत्ते एवं सहायकों के खर्चे कागजों पर दिखाए । वो तो अच्छा हुआ कि ऐन वक्त पर उन्हें विभाग ने चलता कर दिया । जयपुर से प्रकाशित एक पत्रिका एग्रीकल्चर टाईम्स को लाखों रूपये के विज्ञापन दे दिये । जो समाचार पत्र कभी प्रकाशित नहीं होते थे उन्हें भी इस मौके पर ‘‘ अंधा बांटे रेवड़ी, चीन चीन के खाये ’’ की तर्ज पर दे दिये गये । शहर की एक दूरस्थ कॉलोनी बसंत विहार में जनवरी 2016 से 30,000 रूपये प्रतिमाह पर एक मकान किराये पर ले लिया गया जिसका उपयोग अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है ।
    ग्रीन सिंहस्थ, क्लीन सिंहस्थ और हाईटेक सिंहस्थ के नाम पर प्रचारित इस कुंभ को लूट का सिंहस्थ बना दिया गया । आंधी युक्त बारिश को लोग भले ही प्राकृतिक आपदा कहें, असल में यह उस भगवान का रोष ही था, जिसे मोहरा बनाकर अधिकारी, नेता और साधु संतों ने मिलकर जन-धन को लूटा है । पुलिस ने क्राउड मैनेजमेंट के नाम पर जनता के साथ बदतमीजी की और श्रद्धालुओं की भीड़ को जुटने ही नहीं दिया । जितने आए वे या तो दुखी रहे या भारी मन से स्नान कर लौट गए ।
विश्व की सबसे महंगी प्याऊ चार मटकों वाली 80 हजार रूपये में
    धर्म की आड़ में किस तरह अपना उल्लू सीधा किया जाता है । यह देखना है तो 80 हजार रूपये में इन्दौर के एक व्यापारी को 4 मटकों की प्याऊ देकर सरकार ने साबित कर दिया । दरअसल यह प्याऊ आर.ओ. युक्त ठंडा पानी देने के लिये बननी थी, लेकिन प्याऊ के नाम पर एक प्लेटफार्म बनाकर 90 लाख रूपये ठेकेदार को देकर अपने कर्त्तव्य ही इतिश्री कर ली गई जबकि ठेकेदार ने एक ईंट नहीं लगाई । केवल चार मटके, बगैर छना पानी और कपड़े से ढंके मटकों से लोगों को पानी पिला दिया गया ।
दुर्घटना बीमा के नाम पर लूट
    सिंहस्थ अवधि के दौरान आगंतुक यात्रियों और उज्जैन की जनता का दुर्घटना बीमा सरकार ने कराया और उस पर 1.70 करोड़ की प्रीमियम जमा की और उस बीमा कम्पनी ने मुआवजा दिया कुल 12 लाख रूपये उन श्रद्धालुओं को जिनकी मौत अंधड़ में हुई सिर्फ मरने पर ही बीमा मिलना था तो सरकार नगद ही दे देती बीमा करवाने की जरूरत क्या थी । आंधी युक्त बारिश में 50 करोड़ का नुकसान हुआ । उसके नुकसान का आंकलन तो बीमा कम्पनी ने कराया नहीं । साथ ही महामण्डलेश्वर रसानंदजी महाराज की मृत्यु पर और अन्य यात्रियों की मृत्यू पर उन्हें कोई बीमा नहीं मिला, केवल 6 मृतकों को 12 लाख रूपये दिये गये।
27 अप्रैल को भी टेण्डर हुआ
    22 अप्रैल से प्रारंभ हुए कुंभ में फर्जी टेण्डरबाजी अंत तक चलती रही । ऑनलाईन टेण्डर 27.04.2016 को 83.50 लाख रूपये का एक टेण्डर नगर निगम उज्जैन ने ई-टेण्डर क्रमांक 2203 के नाम से जारी किया जिसमें निरंजनी अखाड़ा के बिल्डिंग और अन्य निर्माण कार्य एक महीने में करने का काम दिया गया यानी 27 अप्रैल से 27 मई के बीच । नगर निगम उज्जैन की विज्ञप्ति क्र. 834 दिनांक 06.04.2015 के अनुसार 90 लाख रूपये की एक अन्य निविदा बुलाई गई, जिसमें प्याऊ के प्लेटफार्म बनाने का टेण्डर दिया गया ।

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