अच्छी खबर! सरकार ने भविष्य निधि से धन निकासी के नए नियम वापस लिए, पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी

PUBLISHED : Apr 20 , 7:54 AMBookmark and Share




हैदराबाद : कर्मचारी भविष्य निधि की योजना से धन निकालने के नियमों को सख्त किये जाने के खिलाफ कर्मचारियों के बढ़ते विरोध के मद्देनजर सरकार ने संबंधित अधिसूचना को मंगलवार को रद्द कर दिया। इस फैसले से कुछ ही घंटे पहले सरकार की ओर से कहा गया था कि वह अधिसूचना के क्रियान्वयन को तीन महीने के लिये टाल रही है।
केंद्रीय श्रम मंत्री बंदारू दत्तात्रेय ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘दस फरवरी 2016 को जारी अधिसूचना रद्द कर दी गयी है। अब पुरानी व्यवस्था बनी रहेगी।’ उन्होंने कहा, ‘मैं ईपीफएओ के केंद्रीय न्यासी बोर्ड से इसकी पुष्टि कराऊंगा।’ गौरतलब है कि इस मुद्दे पर कर्नाटक के सिले-सिलाये वस्त्र उद्योग के श्रमिक दो दिन से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे जिसने आज हिंसक रूप ले लिया। श्रमिकों ने आज बेंगलुरू में कई बसों को आग लगा दी और एक थाने पर पथराव किया।
संशोधित नियम को वापस लिये जाने के कारणों के बारे में बताते हुए दत्तात्रेय ने कहा, ‘इसका कारण ट्रेड यूनियनों का अनुरोध है। भविष्य निधि से निकासी नियमों को कड़ा करने का फैसला भी ट्रेड यूनियनों की राय से लिया गया था। अब जब ट्रेड यूनियन अनुरोध कर रहे हैं, तब हमने निर्णय को वापस ले लिया।’

इससे पहले, नई दिल्ली में मंत्री ने कहा था, ‘अधिसूचना (भविष्य निधि निकासी नियमों को सख्त बनाने से जुड़ी) लागू किये जाने का काम 31 जुलाई, 2016 तक के लिये टाला जा रहा है। हम संबद्ध पक्षों के साथ इस बारे में चर्चा करेंगे।’ दत्तात्रेय ने कहा कि कर्मचारियों तथा श्रमिकों को अधिसूचना रद्द होने के मद्देनजर कोई गलत धारणा रखने की जरूरत नहीं है।

संशोधित नियम के तहत भविष्य निधि में नियोक्ताओं के योगदान की निकासी पर कर्मचारियों के 58 साल होने तक के लिये रोक लगायी गयी थी।

मामले को ठंडा करने के इरादे से श्रम मंत्रालय ने यह भी कहा कि वह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन :ईपीएफओ: के पास जमा पूरी राशि को मकान खरीदने, गंभीर बीमारी, शादी तथा बच्चों की पेशेवर शिक्षा जैसे कार्यों के लिये अंशधारकों को निकालने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। मामले को मंजूरी के लिये कानून मंत्रालय के पास भेजा गया है।

इस निर्णय के खिलाफ ऑनलाइन अभियान भी चलाया गया। इसे 10 फरवरी से लागू किया जाना था लेकिन विरोध को देखते हुये इसे 30 अप्रैल तक टाल दिया गया। प्रदर्शनकारियों ने बेंगलुर में हेब्बगोदी पुलिस स्टेशन पर पथराव किया और वहां खड़े वाहनों में आग लगा दी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व किसी ट्रेड यूनियन द्वारा नहीं किया जा रहा था।

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