घटेगा टैक्स: रोजमर्रा इस्तेमाल की इन चीजों पर कम हो सकता है GST

PUBLISHED : Oct 13 , 9:01 AMBookmark and Share




केंद्र सरकार रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली कई वस्तुओं पर जल्द जीएसटी की दरों को घटाएगी। जीएसटी परिषद उस प्रस्ताव पर विचार कर रही है जो आम जनता से जुड़ी हुई हैं और उन पर एकीकृत टैक्स की उच्चतम दर लागू है।जीएसटी परिषद की अगली बैठक नौ नवंबर को है।

ये चीजें हो सकती है सस्ती
-सफेद चॉकलेट
-मस्टर्ड सॉस
-कस्टर्ड पाउडर
-शैम्पू
-बालों में लगाने वाली क्रीम पर दरों को 12 से 18 प्रतिशत के बीच तय कर सकती है। इन सभी वस्तुओं पर मौजूदा समय 28 फीसदी जीएसटी लागू है।

इसी तरह से स्टेशनरी से जुड़ी ज्यादातर सामग्री की दरों में कमी लाई जाएगी। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक परिषद सौ से भी ज्यादा उन चीजों पर दरों को घटाएगी, जिनका उपयोग रोजमर्रा के कामकाज में होता है। जीएसटी लागू होने पर इनमें से अधिकतर वस्तुओं पर कर की दर 28 फीसदी रखा गया था। हालांकि स्टेशनरी उत्पादों में फाइलें, किताबों की बाइंडिंग से जुड़ी सामग्री, लेटर क्लिप्स, लेटर कॉर्नर्स, पेपर क्लिप्स, इंडैक्सिंग टैग और कार्यालयों में प्रयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं पर 18 फीसद की दर लागू की गई थी।

सरकार इसकी समीक्षा कर रही है कि रोजमर्रा की कौन सी वस्तु पर सही दर लागू है और कौन सी ऐसी वस्तुएं हैं जिनका उपयोग ज्यादातर लोग करते हैं। उनकी दरों में कमी लाए जाने की जरूरत है। दरअसल, रोजाना इस्तेमाल में लाई जाने वाली कई वस्तुओं पर जीएसटी दरों में समानता नहीं है। यही वजह है कि ऐसी वस्तुओं की एक सूची तैयार की गई थी, जिस पर पिछली बैठक में भी चर्चा हुई थी। सरकार तीन माह से लगातार इस मुद्दे पर विभिन्न पक्षकारों से सुझाव ले रही है।

उद्योग संगठनों ने भी दर घटाने की मांग रखी
दिल्ली मूल की कंफडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने भी सरकार से सिर्फ विलासितापूर्ण और अहितकर वस्तुओं पर ही जीएसटी दर 28 फीसद रखने और अन्य जरूरी वस्तुओं की दरों पर पुनर्विचार करने की मांग की। सीएआईटी महासचिव प्रवीण खंडेलवाल के मुताबिक सरकार रोजमर्रा के प्रयोग में लाई जाने वाली वस्तुओं पर दरों को कम करने की हमारी मांग है। उम्मीद है कि परिषद की अगली बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।

27 वस्तुओं की दर पिछली बैठक में घटी
परिषद की 22वीं बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए थे। कुछ चीजों के टैक्स में भी बदलाव किए गए हैं, जिसमें 22 वस्तुओं तथा 5 सेवाओं के टैक्सों में कटौती की गई है। इस कटौती से सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को फायदा होगा। इनमें रिटर्न दाखिल करने के समय में बदलाव कंपोजिशन स्कीम का दायरा बढ़ाना और निर्यातकों को रिफंड दिए जाने के तरीकों में सुधार किए गए हैं। 

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