ITR भरने के लिए अहम है ये तारीख, नहीं तो देनी पड़ सकती है पेनल्टी

PUBLISHED : Aug 15 , 8:14 PMBookmark and Share


ITR भरने के लिए अहम है ये तारीख, नहीं तो देनी पड़ सकती है पेनल्टी

इनकम टैक्स रिटर्न भरने की सीजन शुरू हो चुका है। आम टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2019 है। 31 जुलाई तक पर्सनल इनकम टैक्स, हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली और ऐसे टैक्सपेयर्स जिनका अकाउंट ऑडिट नहीं होता उनका रिटर्न जाना है।

अगर आपने 31 जुलाई की डेडलाइन मिस कर दी तो आपको पेनल्टी देनी पड़ेगी। वैसे आईटीआर भारने की आखिरी तारीख 31 मार्च 2020 होती है लेकिन इतनी देर से भरने के लिए आपको पेनल्टी देनी होती है। अगर आपने 31 मार्च तक अपना रिटर्न फाइल नहीं किया तो आईटीआर विभाग आपको नोटिस भेज देता है।

इतना भरना होता है जुर्माना

    31 जुलाई 2019 के बाद और 31 दिसंबर 2019 से पहले आईटीआर फाइल करने पर 5 हजार रुपए जुर्माना देना होता है।
    वहीं 1 जनवरी 2020 से 31 मार्च 2020 तक रिटर्न फाइल करने पर जुर्माना 10 हजार रुपए भरना पड़ता है। - - - ऐसे छोटे टैक्सपेयर्स जिनकी आय 5 लाख रुपए से ज्यादा नहीं है उनको अधिकतन लेट फीस 1 हजार रुपए देनी होगी।
    60 साल से ऊपर के लोगों के लिए ये सीमा 3 लाख रुपए है और 80 साल से ऊपर के लोगों के लिए 5 लाख रुपए है।
    कंपनी और फर्म के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है। जिन लोगों को सेक्शन 92ई के तहत रिपोर्ट जमा करनी होती है उनके लिए आखिरी तारीख 30 नवंबर 2019 है।

आगे बढ़ सकती है आईटीआर फाइल करने की तारीख
केंद्र सरकार ने बिना जुर्माने के आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने की समयसीमा एक जुलाई से आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। फॉर्म 16 जारी करने की तारीख 30 जून से 10 जुलाई करने के केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के फैसले के बाद ऐसी संभावनाओं को बल मिला है।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को फॉर्म 16 दस जुलाई तक मिल पाता है तो 31 जुलाई तक सभी के लिए आईटीआर भरना संभव नहीं हो पाएगा। आखिरी वक्त पर आईटीआर भरने की होड़ से ई-फाइलिंग साइट भी ठप हो सकती है। ऐसे में आईटीआर भरने की अंतिम तिथि को कम से कम 31 अगस्त तक बढ़ाया जा सकता है।

आईटीआर में हुए हैं बदलाव
क्लियर टैक्स के सीईओ अर्चित गुप्ता ने कहा कि फॉर्म 16 और आईटीआर फॉर्म में हुए नए बदलावों को देखते हुए करदाताओं को पर्याप्त समय मिलना जरूरी है। इससे नियोक्ता कंपनी, कर्मचारियों और आयकर विभाग के लिए भी रिटर्न की प्रोसेसिंग में आसानी होगी। फॉर्म 16 टीडीएस प्रमाणपत्र होता है, जो नियोक्ता कंपनी द्वारा कर्मचारी को जारी किया जाता है। इसमें आपको पूरे साल में दी गई रकम और कर कटौती का उल्लेख होता है। इसमें पार्ट ए में कर कटौती और पार्ट बी में वेतन के तमाम मदों का जिक्र होता है।

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